पीपलकोटी-विष्णुगाड टनल हादसा: एक और श्रमिक की मौत, मृतकों की संख्या 11 हुई

Wed 19-Aug-2026,11:35 AM IST +05:30

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पीपलकोटी-विष्णुगाड टनल हादसा: एक और श्रमिक की मौत, मृतकों की संख्या 11 हुई Chamoli Tunnel Accident
  • मृतकों की संख्या 11: एम्स ऋषिकेश में एक घायल श्रमिक ने दम तोड़ा।

  • 117 घंटे रेस्क्यू: एनडीआरएफ और एसडीआरएफ ने लगातार बचाव अभियान चलाया।

  • हाइड्रो प्रोजेक्ट पर सवाल: हादसे के बाद सुरक्षा और पहाड़ों में निर्माण को लेकर बहस तेज।

Uttarakhand / Chamoli :

Chamoli / उत्तराखंड के चमोली जिले में टीएचडीसी की पीपलकोटी-विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टनल में हुए हादसे में एक और श्रमिक की मौत हो गई है। गंभीर रूप से घायल श्रमिक ने ऋषिकेश स्थित एम्स में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इसके साथ ही हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है। हादसे के बाद करीब पांच दिनों तक चले लगातार बचाव अभियान के बावजूद कई श्रमिकों की जान नहीं बचाई जा सकी।

डेढ़ किलोमीटर अंदर हुआ था हादसा
हादसा 13 अगस्त की शाम करीब 6:30 बजे निर्माणाधीन टनल के भीतर करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर हुआ था। भारी भूस्खलन और पहाड़ी से पानी के रिसाव के चलते टनल में काम कर रहे 22 श्रमिक फंस गए थे। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और राहत-बचाव एजेंसियों ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।

रेस्क्यू अभियान के दौरान 12 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। सभी को उपचार के लिए जिला अस्पताल गोपेश्वर में भर्ती कराया गया था। वहीं, टनल के अंदर फंसे श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार अभियान में जुटी रहीं।

117 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन
टनल में करीब 117 घंटे तक लगातार बचाव अभियान चलाया गया। टनल के भीतर बड़ी मात्रा में पानी और कीचड़ जमा होने के कारण रेस्क्यू टीमों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पानी निकालने के लिए पंप लगाए गए और कीचड़ के बीच लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया गया।

रेस्क्यू टीमों ने टनल के अंदर फंसी मशीनों को भी बाहर निकाला। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवान बेहद कठिन परिस्थितियों में बारी-बारी से टनल के भीतर जाकर तलाशी अभियान चलाते रहे।

लगातार मिलते रहे शव
हादसे के बाद पहले दिन चार श्रमिकों के शव बरामद किए गए। इसके बाद 14 अगस्त को तीन और शव मिले। 15 अगस्त को एक अन्य श्रमिक का शव बरामद हुआ। मंगलवार को सुबह एक और शव तथा दोपहर में एक और शव मिलने की जानकारी सामने आई।

बरामद शवों में लुकासा टोपनों (31) और चेतन पोयाम की पहचान हुई है। लुकासा झारखंड के रहने वाले थे, जबकि चेतन पोयाम छत्तीसगढ़ के निवासी बताए गए हैं। एक अन्य घायल श्रमिक ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जिसके बाद मृतकों की संख्या 11 तक पहुंच गई।

हाइड्रो प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा पर सवाल
हादसे के बाद उत्तराखंड में जल विद्युत परियोजनाओं की सुरक्षा और पहाड़ों में बड़े निर्माण कार्यों को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय प्रवक्ता सत्य प्रकाश सती ने पहाड़ों में हाइड्रो प्रोजेक्ट्स को तत्काल बंद करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी परियोजनाओं के कारण पहाड़ खोखले हो रहे हैं और स्थानीय लोगों को लाभ के बजाय नुकसान उठाना पड़ रहा है।

हालांकि, हादसे की परिस्थितियों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विस्तृत जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है। फिलहाल राहत और बचाव अभियान के बाद प्रशासन के सामने हादसे के कारणों की पड़ताल और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की चुनौती है।