Bengal News: TMC में बगावत के बीच अभिषेक का बड़ा कदम
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TMC News
अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर से मिलकर 20 सांसदों पर कार्रवाई की मांग की।
दल-बदल कानून के तहत सदस्यता समाप्त करने की प्रक्रिया पर जोर दिया।
टीएमसी में बगावत और नई पार्टी बनाने की अटकलों से बढ़ी राजनीतिक हलचल।
Kolkata / पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इसी बीच पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर 20 सांसदों से जुड़े मामले में जल्द निर्णय लेने का अनुरोध किया है। इस मुलाकात के दौरान उनके साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी भी मौजूद थे।
बैठक के बाद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के कारण वह स्पीकर से नहीं मिल पाए थे, लेकिन अब उन्होंने पार्टी की ओर से अपना पक्ष विस्तार से रखा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी सांसद को उनके बयान से आपत्ति है तो वह उनके खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है। उन्होंने कहा कि वह अदालत में अपने दावों को साबित करने के लिए तैयार हैं।
अभिषेक बनर्जी ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राजनीति में जीत और हार सामान्य बात है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति संघर्ष करने के बजाय राजनीतिक लाभ के लिए विरोधी दलों से हाथ मिलाता है, तो उसके लिए तृणमूल कांग्रेस में कोई स्थान नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग दबाव, डर या अन्य कारणों से अपने राजनीतिक सिद्धांतों से समझौता कर रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि उन्हें जानकारी मिली है कि टीएमसी के 4 से 5 सांसद नई राजनीतिक पार्टी बनाने की तैयारी कर रहे हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने स्पीकर को संविधान की दसवीं अनुसूची (Anti-Defection Law) के नियमों की जानकारी दी। अभिषेक ने कहा कि यदि कोई सांसद स्वेच्छा से पार्टी छोड़ता है तो उसकी सदस्यता समाप्त हो सकती है। वहीं, किसी दल के वैध विलय के लिए कम से कम दो-तिहाई सदस्यों का दूसरी पार्टी में शामिल होना जरूरी होता है।
टीएमसी के लोकसभा नेता के रूप में अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर को 20 डिस्क्वालिफिकेशन याचिकाएं भी सौंपी हैं। उन्होंने कहा कि इन मामलों पर अंतिम फैसला स्पीकर को ही लेना है और पार्टी ने उनसे जल्द निर्णय लेने का अनुरोध किया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि लोकसभा का मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले इस मामले में कोई महत्वपूर्ण फैसला आ सकता है।
इस पूरे विवाद के बीच अभिषेक बनर्जी हाल ही में केंद्रीय एजेंसियों की जांच का भी सामना कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि ईडी ने उनसे लगभग 11 घंटे तक पूछताछ की थी, जबकि सीआईडी ने भी आठ घंटे से अधिक समय तक सवाल-जवाब किए। अभिषेक का आरोप है कि पिछले कुछ समय से विपक्षी नेताओं पर दबाव बनाने और राजनीतिक दलों को कमजोर करने की कोशिशें की जा रही हैं।
फिलहाल टीएमसी के भीतर जारी यह सियासी संघर्ष पश्चिम बंगाल की राजनीति का सबसे चर्चित विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर लोकसभा स्पीकर के फैसले और पार्टी के अगले राजनीतिक कदमों पर टिकी हुई है।