TMC Crisis: बागी विधायकों ने पार्टी खातों की जांच की मांग की

Fri 19-Jun-2026,08:45 PM IST +05:30

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TMC Crisis: बागी विधायकों ने पार्टी खातों की जांच की मांग की Kolkata News
  • टीएमसी के 10 विधायकों ने पार्टी खातों की जांच की मांग की।

  • साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई।

  • संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और धन के स्रोतों पर सवाल उठाए गए।

West Bengal / Kolkata :

Kolkata / पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। पार्टी के कुछ बागी विधायकों ने टीएमसी से जुड़े बैंक खातों के लेन-देन की जांच की मांग करते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। इस घटनाक्रम ने पार्टी के अंदरूनी मतभेदों को खुलकर सामने ला दिया है और राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।

जानकारी के अनुसार, ऋतब्रता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले 10 तृणमूल कांग्रेस विधायकों ने बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में पार्टी से जुड़े कुछ बैंक खातों में हुए वित्तीय लेन-देन को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इन विधायकों ने विशेष रूप से उन तीन खातों का उल्लेख किया है, जिनका जिक्र पहले पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास द्वारा बैंक अधिकारियों को भेजे गए पत्र में किया गया था।

अरूप बिस्वास ने खुद को पार्टी का कोषाध्यक्ष बताते हुए संबंधित बैंकों को पत्र लिखकर इन खातों से होने वाले लेन-देन पर रोक लगाने का अनुरोध किया था। इसके बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया। अब बागी विधायकों का आरोप है कि इन खातों में ऐसे स्रोतों से धन जमा किया गया हो सकता है, जिनकी पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।

शिकायतकर्ताओं ने आशंका जताई है कि इन खातों का इस्तेमाल कथित रूप से संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों के लिए किया गया हो सकता है। उनके अनुसार, धन के लेन-देन में ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल प्लेटफॉर्म और इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यमों का उपयोग किया गया, जिससे धन के वास्तविक स्रोत को छिपाने की कोशिश की गई हो सकती है।

हालांकि शिकायत में यह भी स्वीकार किया गया है कि उनके पास फिलहाल धन के वास्तविक स्रोत, लेन-देन में शामिल सभी व्यक्तियों की पहचान या पूरी वित्तीय श्रृंखला से संबंधित ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद उन्होंने मामले की विस्तृत जांच की मांग की है।

विधायकों ने पुलिस को चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो संभावित सबूतों को नष्ट करने, छिपाने या उनके साथ छेड़छाड़ किए जाने का खतरा हो सकता है। इसी आधार पर उन्होंने साइबर क्राइम पुलिस से तत्काल जांच शुरू करने की अपील की है।

फिलहाल इस मामले को लेकर तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर और बड़ा रूप ले सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसियां इस शिकायत पर क्या कदम उठाती हैं और मामले में आगे क्या खुलासे होते हैं।