यमुना तट किले पहुंचे धीरेंद्र शास्त्री, धार्मिक विरासत पर दिया जोर

Wed 22-Apr-2026,06:27 PM IST +05:30

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यमुना तट किले पहुंचे धीरेंद्र शास्त्री, धार्मिक विरासत पर दिया जोर Dhirendra-Krishna-Shastri-Yamuna-Fort-Visit-Heritage
  • धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने यमुना तट स्थित ऐतिहासिक किले का दौरा कर उसके धार्मिक, पौराणिक और सांस्कृतिक महत्व को करीब से समझा और सराहा।

  • सेना अधिकारी ने किले की रणनीतिक और ऐतिहासिक भूमिका पर प्रकाश डाला, जिससे इसकी विरासत और महत्व को नया दृष्टिकोण मिला।

  • शास्त्री ने धरोहर संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि ऐसे स्थलों को सहेजना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी संस्कृति से जुड़ी रहें।

Madhya Pradesh / Bhopal :

Madhya Pradesh/ यमुना तट पर स्थित एक ऐतिहासिक किले में Dhirendra Krishna Shastri के दौरे ने धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को एक बार फिर उजागर किया है। बागेश्वर सरकार के नाम से लोकप्रिय शास्त्री ने इस दौरान किले के प्राचीन स्थापत्य, धार्मिक मान्यताओं और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को विस्तार से जाना।

दौरे के दौरान उनके साथ मौजूद अधिकारियों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने किले के इतिहास और इसकी विशेषताओं की जानकारी दी। एक सेना अधिकारी ने किले की रणनीतिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह किला न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है, बल्कि इसका संबंध कई पौराणिक मान्यताओं से भी जुड़ा हुआ है।

किले की संरचना, उसके निर्माण की शैली और समय-समय पर हुए बदलावों के बारे में भी विस्तार से चर्चा की गई। बताया गया कि यह स्थल सदियों से आस्था और इतिहास का केंद्र रहा है, जहां धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ सांस्कृतिक परंपराएं भी जीवित हैं।

Dhirendra Krishna Shastri ने इस अवसर पर कहा कि देश की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों का संरक्षण बेहद आवश्यक है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ियों को अपने इतिहास और संस्कृति से जोड़ने के लिए ऐसे स्थलों को सहेजना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के किले हमारी पहचान और गौरव के प्रतीक हैं।

उनके दौरे के दौरान स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में लोग उन्हें देखने और उनके विचार सुनने के लिए एकत्रित हुए। कार्यक्रम में धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल बना रहा, जिससे यह आयोजन और भी खास बन गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के दौरे ऐतिहासिक स्थलों के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ाने में मदद करते हैं। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलता है, बल्कि सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति समाज में सकारात्मक संदेश भी जाता है।

कुल मिलाकर, यह दौरा धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक चेतना और ऐतिहासिक धरोहर के महत्व को उजागर करने वाला साबित हुआ।