Ladakh Mountaineering Expedition: भारतीय टीम ने कठिन मौसम में हासिल की बड़ी कामयाबी
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
Ladakh Mountaineering Expedition
JIM&WS की टीम ने लद्दाख की कई दुर्गम चोटियों पर सफल चढ़ाई की।
कर्नल हेमचंद्र सिंह ने 5600 मीटर की ऊंचाई से ऐतिहासिक पैराग्लाइडिंग की।
अभियान ने लद्दाख में भारत की साहसिक गतिविधियों और उपस्थिति को मजबूत किया।
Leh / जवाहर पर्वतारोहण एवं शीतकालीन खेल संस्थान (JIM&WS), पहलगाम ने एक बार फिर भारतीय साहसिक खेलों और पर्वतारोहण के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है। संस्थान द्वारा लद्दाख के रुमत्से फू क्षेत्र स्थित ख्याम त्सो पर्वतमाला में 22 सदस्यीय पर्वतारोहण अभियान का सफल आयोजन किया गया। यह अभियान 26 जून 2026 को टीम लीडर कर्नल हेमचंद्र सिंह के नेतृत्व में शुरू हुआ था, जिसका उद्देश्य क्षेत्र की दुर्गम और कम खोजी गई चोटियों तक पहुंच बनाना था।
अभियान की शुरुआत से पहले टीम ने लद्दाख की ऊंचाई और मौसम के अनुरूप खुद को ढालने के लिए एक सुव्यवस्थित अनुकूलन (Acclimatization) कार्यक्रम का पालन किया। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और ऊंचाई से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद टीम ने अपने लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ना जारी रखा।
अभियान की पहली बड़ी सफलता 2 जुलाई 2026 को मिली, जब टीम ने खराब मौसम के बीच पहली बार 5901 मीटर ऊंचे माउंट पीक प्वाइंट पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की। यह उपलब्धि इसलिए भी खास रही क्योंकि यह चोटी पहले कभी फतह नहीं की गई थी। इसी दौरान टीम लीडर कर्नल हेमचंद्र सिंह ने एक और ऐतिहासिक कारनामा करते हुए 5600 मीटर की ऊंचाई से पहली बार पैराग्लाइडिंग उड़ान भरी। इतनी अधिक ऊंचाई से की गई यह उड़ान अभियान की सबसे यादगार उपलब्धियों में शामिल रही।
इसके बाद टीम ने 3 जुलाई को मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करते हुए 6090 मीटर ऊंची तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण चोटी और 5944 मीटर ऊंचे एक अन्य माउंट पीक प्वाइंट पर भी सफलता हासिल की। इन चोटियों तक पहुंचना आसान नहीं था। बर्फीले रास्ते, तेज हवाएं और कम ऑक्सीजन जैसी कठिनाइयों के बीच पर्वतारोहियों ने अद्भुत साहस, धैर्य और टीम भावना का परिचय दिया।
अभियान का अंतिम चरण 5 जुलाई 2026 को पूरा हुआ, जब टीम ने 6018 मीटर ऊंचे माउंट ख्याम-III पर सफलतापूर्वक विजय प्राप्त की। इसके बाद सभी सदस्य सुरक्षित रूप से रोड हेड कैंप तक वापस लौट आए। इस तरह अभियान अपने सभी निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करते हुए सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
यह उपलब्धि केवल पर्वतारोहण की सफलता भर नहीं है, बल्कि भारतीय युवाओं की साहसिक भावना, सैन्य नेतृत्व और टीम वर्क का भी शानदार उदाहरण है। साथ ही यह अभियान लद्दाख की अनछुई पर्वत श्रृंखलाओं में भारत की बढ़ती उपस्थिति और खोजी गतिविधियों को भी मजबूत करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अभियान भविष्य में साहसिक पर्यटन, पर्वतारोहण प्रशिक्षण और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा देंगे। JIM&WS की यह सफलता देश के पर्वतारोहण इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में याद की जाएगी।