आयुर्वेदिक पांडुलिपियों के संरक्षण हेतु केरल में CCRAS-CSU कार्यशाला

Tue 27-Jan-2026,04:56 PM IST +05:30

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आयुर्वेदिक पांडुलिपियों के संरक्षण हेतु केरल में CCRAS-CSU कार्यशाला Ayurveda-Manuscript-Transcription-Workshop-CCRAS-CSU-Kerala
  • ग्रंथा, वट्टेझुथु और मध्यकालीन मलयालम लिपियों में व्यावहारिक प्रशिक्षण से विद्वानों को प्रत्यक्ष शोध अनुभव मिला।

  • कार्यशाला से आयुर्वेदिक ज्ञान के संरक्षण, डिजिटलीकरण और साक्ष्य-आधारित शोध को नई गति मिली।

Kerala / Thrissur :

नई दिल्ली/ भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के तहत कार्यरत केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) ने नई दिल्ली स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (सीएसयू) के सहयोग से 12 से 25 जनवरी 2026 तक केरल के त्रिशूर स्थित सीएसयू पुरनट्टुकरा (गुरुवायूर) परिसर में आयुर्वेदिक पांडुलिपियों पर 15 दिवसीय लिप्यंतरण क्षमता निर्माण कार्यशाला का सफल आयोजन किया।

यह कार्यशाला सीसीआरएएस और सीएसयू के बीच हुए समझौता ज्ञापन के अंतर्गत आयोजित की गई, जो शास्त्रीय आयुर्वेदिक पांडुलिपियों के दस्तावेजीकरण, डिजिटलीकरण और शोध-आधारित उपयोग के लिए सीसीआरएएस की राष्ट्रीय पहल का हिस्सा है। दो सप्ताह के इस आवासीय कार्यक्रम में आयुर्वेद के 18 और संस्कृत के 15 अध्येताओं सहित कुल 33 विद्वानों ने भाग लिया, जिससे पांडुलिपि अध्ययन के लिए एक मजबूत अंतःविषय दृष्टिकोण विकसित हुआ।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में पांडुलिपि विज्ञान, पुरालेख विज्ञान, आयुर्वेद की तकनीकी शब्दावली और लिपि ज्ञान जैसे विषयों को शामिल किया गया। इसके साथ ही ग्रंथा, मध्यकालीन मलयालम और वट्टेझुथु लिपियों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। प्रतिभागियों को मूल ताड़ के पत्तों की पांडुलिपियों पर प्रत्यक्ष रूप से काम करने का अवसर मिला, जिससे व्यावहारिक और सत्यापन योग्य शोध परिणाम सामने आए।

कार्यशाला के एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक परिणाम के रूप में आयुर्वेद की पांच दुर्लभ और अब तक अप्रकाशित पांडुलिपियों का सफलतापूर्वक लिप्यंतरण किया गया। ये पांडुलिपियां अब उन्नत शोध और अकादमिक उपयोग के लिए उपलब्ध हैं।

समापन सत्र में सीसीआरएएस के महानिदेशक प्रोफेसर वैद्य रबीनारायण आचार्य ने कहा कि यह कार्यक्रम आयुर्वेदिक पांडुलिपि अनुसंधान के क्षेत्र में सीसीआरएएस और सीएसयू के सहयोग की निरंतरता को दर्शाता है। सीएसयू गुरुवायूर परिसर के निदेशक प्रोफेसर के.के. शाइन ने भविष्य में भी इस तरह के संयुक्त प्रयासों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।