भारत में कोयला उत्पादन में 42% का उछाल! 87 खदानों से मजबूत होगी ऊर्जा आपूर्ति, आयात पर निर्भरता होगी कम?
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भारत में कोयला उत्पादन उछाल
अक्टूबर 2026 में कोयला उत्पादन 42% बढ़कर 22.03 मिलियन टन पहुंचा।
अप्रैल से अक्टूबर के दौरान कोयला प्रेषण में 11.53% की वृद्धि दर्ज हुई।
लोहारी खदान को अनुमति मिलने के बाद परिचालनरत खदानों की संख्या 87 हुई।
New Delhi / भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और कोयले के आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। अक्टूबर में कोयला उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज हुई है। आखिर इस तेजी के पीछे क्या वजह है और इससे देश को क्या फायदा होगा?
भारत के कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खनन क्षेत्र से एक उत्साहजनक खबर सामने आई है। वित्त वर्ष 2026-27 के अक्टूबर महीने में इन खदानों से कोयले का उत्पादन बढ़कर 22.03 मिलियन टन यानी 2.203 करोड़ टन तक पहुंच गया। जबकि अक्टूबर 2025 में यह आंकड़ा 15.49 मिलियन टन था। इस तरह एक साल में कोयला उत्पादन में लगभग 42 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
सिर्फ उत्पादन ही नहीं, बल्कि कोयले की आपूर्ति यानी प्रेषण में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। अक्टूबर 2026 के दौरान कोयले का प्रेषण 21.11 मिलियन टन रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी महीने में यह 15.48 मिलियन टन था। इस प्रकार इसमें लगभग 36 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई।
अगर पूरे वित्त वर्ष के अप्रैल से अक्टूबर तक के आंकड़ों पर नजर डालें, तो यहां भी लगातार बढ़ोतरी दिखाई देती है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में इस अवधि के दौरान कोयला उत्पादन 117.23 मिलियन टन तक पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष यह 105.33 मिलियन टन था। यानी उत्पादन में 11.30 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
इसी अवधि में कोयले का प्रेषण भी 111.95 मिलियन टन से बढ़कर 124.86 मिलियन टन हो गया। इसमें 11.53 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। ये आंकड़े बताते हैं कि कोयला खनन क्षेत्र में उत्पादन क्षमता और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम हो रहा है।
इस वृद्धि के पीछे परिचालन दक्षता में सुधार, खनन उत्पादकता में बढ़ोतरी और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसी बीच झारखंड से भी कोयला खनन क्षेत्र के लिए एक अहम खबर सामने आई है। राज्य की लोहारी कोयला खदान को अक्टूबर 2026 में खदान खोलने की अनुमति दे दी गई है। यह खदान पिछले कई वर्षों से परिचालन शुरू होने की प्रतीक्षा कर रही थी। इस मंजूरी को कारोबार में आसानी से जुड़े नीतिगत सुधारों का परिणाम माना जा रहा है।
इसके साथ ही देश में परिचालनरत कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खदानों की संख्या बढ़कर 87 हो गई है। यह विस्तार आने वाले समय में घरेलू कोयला उत्पादन और उपलब्धता को बढ़ाने में मददगार हो सकता है।
सरकार का मानना है कि घरेलू खदानों से उत्पादन बढ़ने पर कोयले के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। इससे आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और विदेशी मुद्रा की बचत भी हो सकेगी। इसके अलावा बिजली उत्पादन और अन्य औद्योगिक गतिविधियों के लिए जरूरी कच्चे माल की उपलब्धता बेहतर बनाने में भी इन खदानों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
मंत्रालय ने कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खनन की पूरी क्षमता का उपयोग सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। इसके लिए उत्पादन बढ़ाने, आपूर्ति संबंधी बाधाओं को दूर करने, नीतिगत सुधारों और नियामक निगरानी पर लगातार ध्यान दिया जाएगा।
कुल मिलाकर, अक्टूबर में 42 प्रतिशत की उत्पादन वृद्धि और परिचालनरत खदानों की संख्या 87 तक पहुंचना भारतीय कोयला क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। अब चुनौती इस रफ्तार को बनाए रखने और देश की बढ़ती ऊर्जा एवं औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप कोयले की विश्वसनीय उपलब्धता सुनिश्चित करने की है।