Indian Navy DSC A-24 Launch: कोलकाता में पांचवें Diving Support Craft का भव्य जलावतरण

Sun 02-Aug-2026,12:00 AM IST +05:30

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Indian Navy DSC A-24 Launch: कोलकाता में पांचवें Diving Support Craft का भव्य जलावतरण Indian Navy Gets New Diving Support Craft
  • कोलकाता में भारतीय नौसेना के पांचवें DSC A-24 गोताखोरी सहायक जहाज का जलावतरण हुआ।

  • जहाज अंडरवॉटर ऑपरेशन, बचाव कार्य और तटीय सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करेगा।

  • 70% स्वदेशी उपकरणों से निर्मित यह पोत आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया को बढ़ावा देता है।

Delhi / Delhi :

Delhi / भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पांच गोताखोरी सहायक जहाज (Diving Support Craft-DSC) परियोजना के तहत निर्मित पांचवें जहाज डीएससी ए-24 (DSC A-24) का 1 अगस्त 2026 को पश्चिम बंगाल के टीटागढ़, कोलकाता स्थित टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड (TRSL) शिपयार्ड में भव्य समारोह के बीच जलावतरण किया गया। इस अवसर पर श्रीमती कमल सिंह ने भारतीय नौसेना के कार्मिक प्रमुख वाइस एडमिरल गुरचरण सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में जहाज का औपचारिक जलावतरण किया। समारोह भारतीय नौसेना की परंपराओं के अनुरूप सैन्य गरिमा और औपचारिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ, जिसमें नौसेना और टीआरएसएल के वरिष्ठ अधिकारी तथा कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

डीएससी ए-24 का निर्माण मेसर्स टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। यह जहाज लगभग 300 से 400 टन विस्थापन क्षमता वाला आधुनिक पोत है, जिसे द्वि-पतवार (Catamaran) डिजाइन पर विकसित किया गया है। इस विशेष डिजाइन के कारण जहाज को समुद्र में बेहतर स्थिरता, अधिक डेक क्षेत्र और प्रतिकूल समुद्री परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट संचालन क्षमता प्राप्त होती है। यही विशेषताएं इसे गोताखोरी अभियानों और समुद्री बचाव कार्यों के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाती हैं।

इन जहाजों का अभिकल्पन और निर्माण इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (IRS) द्वारा निर्धारित नौसैनिक मानकों और सुरक्षा विनियमों के अनुरूप किया गया है। इससे जहाजों की सुरक्षा, विश्वसनीयता और परिचालन दक्षता सुनिश्चित होती है। भारतीय नौसेना में शामिल होने के बाद ये पोत गोताखोरी सहायता, पानी के भीतर निरीक्षण, खोज एवं बचाव अभियान, अंडरवॉटर सर्वेक्षण तथा तटीय क्षेत्रों में विभिन्न परिचालन कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से अंजाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

इस परियोजना की एक बड़ी विशेषता इसका स्वदेशीकरण है। जहाज में उपयोग किए गए लगभग 70 प्रतिशत मुख्य और सहायक उपकरण भारतीय निर्माताओं से प्राप्त किए गए हैं। इससे यह परियोजना भारत सरकार की 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' पहल को मजबूती प्रदान करती है। स्वदेशी तकनीक और घरेलू उद्योगों की भागीदारी से न केवल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ रही है, बल्कि देश की समुद्री सुरक्षा और नौसैनिक क्षमताओं को भी नई ताकत मिल रही है।

डीएससी ए-24 का जलावतरण भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अत्याधुनिक गोताखोरी सहायक जहाज भविष्य में नौसेना की समुद्री अभियानों, बचाव कार्यों और तटीय सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों को और अधिक प्रभावी तथा सुरक्षित बनाएंगे।