Indian Armed Forces: 314 दिनों की समुद्री यात्रा पूरी करने वाली महिला अधिकारियों का Rajnath Singh ने किया सम्मान

Thu 30-Jul-2026,08:09 PM IST +05:30

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Indian Armed Forces: 314 दिनों की समुद्री यात्रा पूरी करने वाली महिला अधिकारियों का Rajnath Singh ने किया सम्मान Samudra Pradakshina Mission
  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ मिशन पूरा करने वाली नौ महिला अधिकारियों को सम्मानित किया।

  • महिला अधिकारियों ने 314 दिनों में 25,500 समुद्री मील की ऐतिहासिक समुद्री यात्रा पूरी की।

  • मिशन ने नारी शक्ति, त्रि-सेवा एकता और आत्मनिर्भर भारत की भावना को मजबूत किया।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को नई दिल्ली में भारतीय सेना के नौकायन पोत आईएएसवी त्रिवेणी (IASV Triveni) से पहली त्रि-सेवा पूर्ण महिला समुद्री यात्रा ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ सफलतापूर्वक पूरी करने वाली तीनों सेनाओं की नौ महिला अधिकारियों को सम्मानित किया। लगभग 314 दिनों तक चली इस ऐतिहासिक यात्रा में अधिकारियों ने चार महासागरों में करीब 25,500 समुद्री मील की दूरी तय कर भारतीय सैन्य इतिहास में नया अध्याय जोड़ा।

महिला अधिकारियों से संवाद करते हुए रक्षा मंत्री ने उनके साहस, अनुशासन और अदम्य संकल्प की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल एक समुद्री यात्रा नहीं, बल्कि ‘नारी शक्ति’, त्रि-सेवा समन्वय और आत्मविश्वास का प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इन अधिकारियों की उपलब्धि देश की हर बेटी को यह विश्वास दिलाती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और समर्पण के बल पर कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।

महिला अधिकारियों ने रक्षा मंत्री के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कठिन मौसम, लंबे समुद्री सफर और अनेक शारीरिक एवं मानसिक चुनौतियों के बावजूद देश के लिए कुछ विशेष करने की भावना ने उन्हें लगातार प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि अभियान की प्रत्येक चुनौती ने उन्हें और अधिक मजबूत बनाया तथा यह अनुभव जीवनभर उनके साथ रहेगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ ने उन सभी रूढ़ियों को तोड़ दिया है, जिनमें यह माना जाता था कि महिलाएं कठिन सैन्य अभियानों को सफलतापूर्वक पूरा नहीं कर सकतीं। उन्होंने कहा, "आपने साबित कर दिया है कि नेतृत्व क्षमता, मानसिक दृढ़ता और शारीरिक योग्यता किसी लिंग की मोहताज नहीं होती। भारत की हर बेटी आपसे प्रेरणा ले सकती है।"

उन्होंने इस अभियान को भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना के बीच उत्कृष्ट तालमेल का प्रतीक बताते हुए कहा कि तीनों सेनाओं के अधिकारियों ने एक ही पोत पर एक साझा मिशन को सफलतापूर्वक पूरा कर राष्ट्रीय एकता और समन्वय का शानदार उदाहरण प्रस्तुत किया है। साथ ही उन्होंने विदेशी बंदरगाहों पर भारत की स्वदेशी तकनीकी क्षमता, इंजीनियरिंग उत्कृष्टता और सैन्य पेशेवर कौशल का प्रभावी प्रदर्शन करने के लिए भी टीम की सराहना की।

यह ऐतिहासिक अभियान 11 सितंबर 2025 को शुरू हुआ था और 22 जुलाई 2026 को मुंबई लौटने के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। लगभग दो वर्षों के कठोर प्रशिक्षण, विस्तृत योजना और तट आधारित सहायता नेटवर्क के सहयोग से इस मिशन को अंजाम दिया गया। यात्रा के दौरान दल ने भूमध्य रेखा को दो बार पार किया, अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा को पार किया तथा केप लीउविन, केप हॉर्न और केप ऑफ गुड होप जैसे विश्व प्रसिद्ध समुद्री मार्गों का सफलतापूर्वक चक्कर लगाया। इसके अलावा दल ने दुर्गम ड्रेक पैसेज को भी पार किया, जिसके बाद उन्हें प्रतिष्ठित केप हॉर्नर्स समुदाय की सदस्यता प्राप्त हुई।

कार्यक्रम के दौरान सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, वायुसेना के उप प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित, नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल अजय कोचर सहित तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ केवल एक साहसिक समुद्री अभियान नहीं, बल्कि सैन्य कूटनीति, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत की भावना का भी सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है।