Indian Navy News: स्वदेशी पनडुब्बी रोधी युद्धपोत ‘मछलीपटनम’ का शुभारंभ, नौसेना की ताकत होगी और मजबूत

Wed 29-Jul-2026,09:16 PM IST +05:30

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Indian Navy News: स्वदेशी पनडुब्बी रोधी युद्धपोत ‘मछलीपटनम’ का शुभारंभ, नौसेना की ताकत होगी और मजबूत Indian Navy News
  • भारतीय नौसेना के सातवें स्वदेशी एएसडब्ल्यू एसडब्ल्यूसी युद्धपोत 'मछलीपटनम' का शुभारंभ हुआ।

  • जहाज पनडुब्बी रोधी अभियान, समुद्री निगरानी और तटीय सुरक्षा को मजबूत करेगा।

  • 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत को नई मजबूती देती है।

Maharashtra / Mumbai :

Mumbai / भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा क्षमता को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) ने 29 जुलाई 2026 को भारतीय नौसेना के लिए निर्मित सातवें पनडुब्बी रोधी उथले जल युद्धपोत (एएसडब्ल्यू एसडब्ल्यूसी) ‘मछलीपटनम’ (बीवाई-529) का भव्य शुभारंभ किया। इस अवसर पर सैन्य मामलों के विभाग के अतिरिक्त सचिव वाइस एडमिरल अतुल आनंद की उपस्थिति में श्रीमती गुलरुख आनंद ने जहाज का औपचारिक शुभारंभ किया। समारोह में भारतीय नौसेना, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारियों तथा अनेक विशिष्ट अतिथियों ने भाग लिया।

‘मछलीपटनम’ का नाम आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में स्थित ऐतिहासिक बंदरगाह शहर मछलीपटनम के नाम पर रखा गया है। यह शहर सदियों से अपनी समृद्ध समुद्री विरासत, व्यापारिक गतिविधियों और भारत के पूर्वी तट पर महत्वपूर्ण बंदरगाह के रूप में प्रसिद्ध रहा है। इस नाम के माध्यम से भारतीय नौसेना ने देश की ऐतिहासिक समुद्री परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने का प्रयास किया है। यह युद्धपोत न केवल उस गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है, बल्कि भारत की समुद्री सीमाओं और रणनीतिक हितों की सुरक्षा के प्रति नौसेना की अटूट प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

यह आधुनिक युद्धपोत अत्याधुनिक तकनीकों और उन्नत हथियार प्रणालियों से लैस है। इसे विशेष रूप से समुद्र के भीतर निगरानी, पनडुब्बी रोधी युद्ध (एंटी-सबमरीन वॉरफेयर), निम्न तीव्रता वाले समुद्री अभियानों (एलआईएमओ) तथा समुद्री बारूदी सुरंगों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने जैसे महत्वपूर्ण अभियानों के लिए विकसित किया गया है। इसके शामिल होने से भारतीय नौसेना की तटीय सुरक्षा, समुद्री निगरानी और समुद्री क्षेत्र की जागरूकता (Maritime Domain Awareness) में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

‘मछलीपटनम’ का शुभारंभ आठ पनडुब्बी रोधी उथले जल युद्धपोतों की परियोजना के सफल क्रियान्वयन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। यह परियोजना भारत सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती प्रदान करती है और देश के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र की बढ़ती क्षमता को प्रदर्शित करती है। इस युद्धपोत में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो भारतीय जहाज निर्माण उद्योग की तकनीकी दक्षता और आत्मनिर्भरता का प्रमाण है।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस परियोजना से न केवल भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक उपस्थिति भी और अधिक मजबूत होगी। भविष्य में यह युद्धपोत समुद्री चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने, तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और राष्ट्रीय समुद्री हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह उपलब्धि भारत के स्वदेशी रक्षा उत्पादन, तकनीकी नवाचार और मजबूत नौसैनिक शक्ति की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।