जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा

Thu 29-Jan-2026,12:48 PM IST +05:30

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जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा NBA-ABS-Grant-Maharashtra-Biodiversity
  • बैसिलस जीनस सूक्ष्मजीवों के व्यावसायिक उपयोग से जैव प्रौद्योगिकी और जैव विविधता संरक्षण के बीच प्रभावी तालमेल स्थापित हुआ है।

  • महाराष्ट्र को मिला एबीएस अनुदान राज्य की जैव विविधता प्रबंधन समितियों और सामुदायिक विकास पहलों को नई गति देगा।

Delhi / New Delhi :

Delhi/ राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) देश में जैविक संसाधनों के संरक्षण, सतत उपयोग और उनसे प्राप्त लाभों के निष्पक्ष वितरण के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी उद्देश्य के तहत एबीएस फ्रेमवर्क के अंतर्गत महाराष्ट्र राज्य जैव विविधता बोर्ड के माध्यम से बीएमसी की जैव विविधता प्रबंधन समिति को 17 लाख रुपये की राशि प्रदान की गई है। यह राशि बैसिलस जीनस से जुड़े मृदा सूक्ष्मजीवों के व्यावसायिक उपयोग से अर्जित की गई है।

इन सूक्ष्मजीवों का उपयोग मूल्यवर्धित प्रोबायोटिक उत्पादों के विकास में किया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जैव विविधता संरक्षण और आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी एक-दूसरे के पूरक बन सकते हैं। लाभ-साझाकरण की यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि जैविक संसाधनों से होने वाले व्यावसायिक लाभ सीधे तौर पर स्थानीय समुदायों तक पहुंचें और सामुदायिक विकास गतिविधियों को बल मिले।

जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में बढ़ते नवाचार के साथ सूक्ष्मजीव औद्योगिक विकास का अहम आधार बनते जा रहे हैं। इस क्षेत्र ने अब तक एबीएस निधि में लगभग 10 करोड़ रुपये का योगदान दिया है, जो स्वास्थ्य, कृषि और औद्योगिक अनुप्रयोगों में सूक्ष्मजीव संसाधनों की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश के बाद, एबीएस लाभ प्राप्त करने वाला दूसरा प्रमुख राज्य बन गया है। लाल चंदन से प्राप्त लाभ को छोड़ दें तो महाराष्ट्र को एबीएस वितरण में सबसे बड़ा हिस्सा मिला है। वर्तमान आवंटन के साथ राज्य को अब तक लगभग 8 करोड़ रुपये की एबीएस सहायता मिल चुकी है, जिससे 200 से अधिक जैव विविधता प्रबंधन समितियों और सात संस्थानों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचा है।

राष्ट्रीय स्तर पर एबीएस के तहत कुल वितरण 144.37 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। यह उपलब्धि जैव विविधता अधिनियम, 2002 के प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाती है और कुनमिंग–मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे के लक्ष्य 13 और 19 के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है। यह पहल सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के साथ-साथ जैव विविधता संरक्षण में भारत के वैश्विक नेतृत्व को भी रेखांकित करती है।