बिहार नाव हादसा: वैशाली में 13 बच्चों की मौत! जर्जर नाव बनी हादसे की वजह?
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Bihar Boat Accident
वैशाली के राघोपुर में गंगा नदी में नाव पलटने से 13 बच्चों की मौत की खबर।
घायलों का पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज जारी।
ग्रामीणों ने नाव की स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए।
Raghopur / गंगा नदी में अचानक पलटी नाव, चीख-पुकार और अपनों को तलाशते परिजन! बिहार के वैशाली में हुए दर्दनाक हादसे ने कई परिवारों को उजाड़ दिया। अब तक 13 बच्चों की मौत की खबर है। आखिर हादसा कैसे हुआ और किसकी लापरवाही के आरोप लग रहे हैं?
बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर दियारा क्षेत्र में गंगा नदी पर हुए नाव हादसे ने पूरे इलाके को गहरे शोक में डुबो दिया है। रामपुर श्यामचंद गांव के पास मंगलवार देर रात यात्रियों से भरी एक निजी नाव अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। इस दर्दनाक दुर्घटना में अब तक 13 बच्चों की मौत की खबर सामने आई है। हादसे के बाद प्रशासन, पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुट गईं।
भोज में शामिल होने जा रहे थे लोग
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नाव में करीब 20 से 30 लोग सवार थे। बताया जा रहा है कि यात्री पड़ोसी गांव में आयोजित एक भोज कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान गंगा नदी में नाव पलट गई और कई लोग पानी में डूब गए।
घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस बल और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल यानी एसडीआरएफ की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। स्थानीय गोताखोरों की मदद से बचाव अभियान चलाया गया। नदी से बच्चों के शव निकाले गए। रिपोर्ट के अनुसार, मृतकों में एक ही परिवार के सात बच्चे शामिल हैं। इस खबर के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है और पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है।
घायलों का पटना में इलाज जारी
हादसे में बचाए गए घायलों को बेहतर इलाज के लिए पटना स्थित नालंदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल यानी एनएमसीएच ले जाया गया। अस्पताल के बाल चिकित्सा विभाग के अध्यक्ष डॉ. अखिलेश कुमार के अनुसार, चार बच्चों में से एक को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि तीन बच्चे भर्ती हैं।
डॉक्टर ने बताया कि एक बच्चे की स्थिति सामान्य है, जबकि दो बच्चों की हालत गंभीर है। इनमें से एक बच्चे को गंभीर निमोनिया होने की जानकारी दी गई है। डॉक्टरों की टीम घायल बच्चों के उपचार में लगी हुई है।
नाव की हालत को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
हादसे के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली। ग्रामीणों का आरोप है कि दुर्घटना में शामिल नाव पुरानी और जर्जर थी। उनका दावा है कि नाव को बदलने के लिए पहले भी कई बार आवेदन दिए गए थे, लेकिन इस दिशा में आवश्यक कार्रवाई नहीं हुई।
नाव की वास्तविक स्थिति, दुर्घटना के कारण और संभावित लापरवाही की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने जिलाधिकारी के विरोध में भी नाराजगी जताई। अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या नाव की सुरक्षा व्यवस्था की नियमित जांच की जा रही थी और यात्रियों की संख्या के अनुरूप पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम मौजूद थे।
चिराग पासवान ने घटनास्थल पर जाने की बात कही
केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनके संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत राघोपुर दियारा में हुई इस दुर्घटना में लोगों की मृत्यु की खबर अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है।
चिराग पासवान ने बताया कि एसडीआरएफ की टीम राहत एवं बचाव कार्य में जुटी है और घायलों को बेहतर इलाज के लिए एनएमसीएच भेजा गया है। उन्होंने जिलाधिकारी से बातचीत कर राहत कार्यों की जानकारी लेने की बात कही। साथ ही उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के माध्यम से प्रभावित परिवारों को अधिकतम सहायता उपलब्ध कराने पर चर्चा हुई है। उन्होंने स्वयं घटनास्थल पर पहुंचकर शोकाकुल परिजनों से मिलने और अस्पताल में भर्ती घायलों के स्वास्थ्य की जानकारी लेने की बात कही।
राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति ने जताया दुख
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वैशाली में हुई नाव दुर्घटना में बच्चों की मौत पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने भी इस घटना पर दुख जताया। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें इस अपूरणीय क्षति को सहने की शक्ति मिले। उन्होंने दुर्घटना से प्रभावित लोगों और लापता व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए भी प्रार्थना की।
अब आगे क्या?
फिलहाल, इस हादसे के कारणों, नाव की स्थिति और सुरक्षा इंतजामों की जांच महत्वपूर्ण होगी। साथ ही, यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि घायलों को समय पर इलाज मिले और प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
गंगा नदी में हुए इस हादसे ने नावों की सुरक्षा, यात्रियों की क्षमता और ग्रामीण क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर प्रशासन की आगे की कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों पर है।