लखनऊ बना यूपी का पहला शून्य ताजे कचरे वाला शहर

Wed 21-Jan-2026,05:05 PM IST +05:30

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लखनऊ बना यूपी का पहला शून्य ताजे कचरे वाला शहर Lucknow-Zero-Fresh-Waste-Scientific-Waste-Management
  • लखनऊ यूपी का पहला शहर बना जिसने 100 प्रतिशत नगरपालिका ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रसंस्करण कर ‘शून्य ताजे अपशिष्ट डंप’ दर्जा हासिल किया।

  • अपशिष्ट-से-ऊर्जा संयंत्र की योजना से RDF से बिजली उत्पादन और परिवहन लागत में बड़ी कमी आएगी।

Uttar Pradesh / Lucknow :

लखनऊ/ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने शहरी अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। तेजी से बढ़ती आबादी और व्यापारिक गतिविधियों के बीच कचरे का वैज्ञानिक और टिकाऊ निपटान किसी भी महानगर के लिए बड़ी चुनौती होता है। लखनऊ नगर निगम (एलएमसी) ने इस दिशा में बहुआयामी रणनीति अपनाते हुए न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी, बल्कि शहर को उत्तर प्रदेश का पहला ‘शून्य ताजे अपशिष्ट डंप’ शहर बनाने में भी सफलता हासिल की है।

लगभग 40 लाख की आबादी और 7.5 लाख से अधिक प्रतिष्ठानों वाले लखनऊ में प्रतिदिन करीब 2,000 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होता है। इस चुनौती से निपटने के लिए लखनऊ नगर निगम ने भूमि ग्रीन एनर्जी के सहयोग से वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन मॉडल को अपनाया। हाल ही में शिवारी में तीसरे ताजे अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र के उद्घाटन के साथ ही शहर की कुल प्रसंस्करण क्षमता 2,100 मीट्रिक टन प्रतिदिन तक पहुंच गई है।

नए शिवारी संयंत्र की क्षमता 700 मीट्रिक टन प्रतिदिन है। इसके साथ ही लखनऊ प्रदेश का पहला ऐसा शहर बन गया है, जहां 100 प्रतिशत नगरपालिका ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रसंस्करण किया जा रहा है। इससे खुले में कचरा डंप करने की आवश्यकता पूरी तरह समाप्त हो गई है।

शहर में कचरे को जैविक (55 प्रतिशत) और अजैविक (45 प्रतिशत) श्रेणियों में विभाजित किया जाता है। जैविक कचरे से खाद और बायोगैस का उत्पादन किया जाता है, जबकि अजैविक कचरे को रिसाइकलिंग या अपशिष्ट-व्युत्पन्न ईंधन (RDF) के रूप में सीमेंट और कागज उद्योगों में उपयोग किया जाता है।

घर-घर कचरा संग्रहण की दक्षता 96.53 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, वहीं स्रोत पर कचरा पृथक्करण 70 प्रतिशत से अधिक हो गया है। नगर निगम के अनुसार अब तक 18.5 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे में से 12.86 लाख मीट्रिक टन का वैज्ञानिक निपटान किया जा चुका है।

इस प्रक्रिया से 2.27 लाख मीट्रिक टन RDF, 4.38 लाख मीट्रिक टन मोटे कण, 0.59 लाख मीट्रिक टन जैव-मिट्टी और 2.35 लाख मीट्रिक टन निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्राप्त हुआ, जिनका उपयोग पुनर्चक्रण, सह-प्रसंस्करण और भूमि भराव जैसे पर्यावरण-अनुकूल कार्यों में किया गया।

लगातार प्रयासों के परिणामस्वरूप 25 एकड़ से अधिक भूमि का पुनर्विकास किया गया है। यहां अब विंडरो पैड, आंतरिक सड़कें, शेड, वेइब्रिज और पूर्ण अपशिष्ट प्रसंस्करण प्रणाली विकसित हो चुकी है।

आने वाले समय में एलएमसी शिवारी में 15 मेगावाट का अपशिष्ट-से-ऊर्जा (WTE) संयंत्र स्थापित करने की तैयारी कर रहा है, जो प्रतिदिन 1,000–1,200 मीट्रिक टन RDF से बिजली उत्पन्न करेगा। इससे लंबी दूरी तक RDF परिवहन की आवश्यकता कम होगी।

लखनऊ का यह मॉडल चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों पर आधारित है और देश के अन्य शहरों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है।