NEET Paper Leak Protest: महाराष्ट्र सरकार ने छात्रों पर दर्ज सभी FIR वापस लेने का किया ऐलान, फडणवीस ने दिए निर्देश
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NEET Paper Leak Protest
महाराष्ट्र सरकार ने नीट आंदोलन से जुड़े छात्रों पर दर्ज सभी एफआईआर वापस लेने का फैसला किया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गृह विभाग को कानूनी प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए।
बिहार और असम के बाद महाराष्ट्र ने भी प्रदर्शनकारी छात्रों को बड़ी राहत देने की घोषणा की।
Mumbai / नीट-यूजी पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में हुए छात्र आंदोलनों के बाद महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर और अन्य मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश राज्य के गृह विभाग को दिए हैं। इस फैसले से आंदोलन में शामिल हजारों छात्रों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
यह निर्णय केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच हुई बातचीत के बाद सामने आया है। दोनों पक्षों के बीच जिन प्रमुख मांगों पर सहमति बनी थी, उनमें से एक मांग यह भी थी कि भाजपा और उसके समर्थन वाली राज्य सरकारें छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेंगी। इसी समझौते के तहत अब महाराष्ट्र सरकार ने भी कानूनी प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है।
इससे पहले बिहार और असम सरकारें भी इसी दिशा में कदम उठा चुकी हैं। बिहार सरकार ने घोषणा की थी कि 26 जुलाई 2026 की शाम 6 बजे तक नीट आंदोलन से जुड़े सभी एफआईआर, शिकायतें और कारण बताओ नोटिस वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। साथ ही आंदोलन में शामिल छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी तथा हिरासत में लिए गए लोगों को भी रिहा किया जाएगा।
गौरतलब है कि नीट-यूजी पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद बिहार सहित देश के कई राज्यों में छात्रों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए थे। कई स्थानों पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी और कुछ छात्रों को हिरासत में भी लिया गया था। इन कार्रवाइयों को लेकर छात्र संगठनों और विभिन्न सामाजिक समूहों ने लगातार विरोध जताया था।
महाराष्ट्र सरकार का यह फैसला उसी आश्वासन का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों से बातचीत के दौरान उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की बात कही थी। अब गृह विभाग संबंधित मामलों की समीक्षा कर उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत वापस लेने की कार्रवाई करेगा। माना जा रहा है कि इस फैसले से आंदोलन में शामिल छात्रों को राहत मिलेगी और उनके भविष्य पर कानूनी मामलों का बोझ नहीं रहेगा।