ओडिशा में BJD का बड़ा एक्शन: क्रॉस वोटिंग पर 6 विधायक सस्पेंड

Sat 21-Mar-2026,09:13 PM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

ओडिशा में BJD का बड़ा एक्शन: क्रॉस वोटिंग पर 6 विधायक सस्पेंड Odisha Rajya Sabha Election
  • क्रॉस वोटिंग पर 6 विधायक सस्पेंड.

  • पार्टी व्हिप के उल्लंघन का आरोप.

  • ओडिशा राजनीति में बढ़ी हलचल.

Odisha / Bhubaneshwar :

Odisa / ओडिशा की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब बीजू जनता दल (BJD) ने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने वाले अपने ही छह विधायकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह फैसला पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवीन पटनायक के निर्देश पर लिया गया, जिससे साफ संकेत मिला कि पार्टी अनुशासन को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहती।

निलंबित किए गए विधायकों में बालीगुड़ा के चक्रमणि कन्हार, जयदेव के नबा किशोर मल्लिक, चौद्वार-कटक के सौविक बिस्वाल, बस्ता की सुबासिनी जेना, तिर्तोल के रमाकांत भोई और बंकी के देवी रंजन त्रिपाठी शामिल हैं। पार्टी द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया कि इन विधायकों को 21 मार्च 2026 से पार्टी से सस्पेंड किया जा रहा है और यह निर्णय तुरंत प्रभाव से लागू होगा।

बीजेडी ने अपने फैसले में कहा कि इन विधायकों ने पार्टी के मूल सिद्धांतों और अनुशासन का उल्लंघन किया है। विशेष रूप से 16 मार्च 2026 को हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान उन्होंने पार्टी व्हिप के खिलाफ जाकर क्रॉस वोटिंग की, जो पार्टी की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया के खिलाफ है। पार्टी का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां संगठन की एकजुटता और विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाती हैं।

दरअसल, हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में ओडिशा से चार सीटों पर चुनाव हुआ था, जिसमें बीजेपी को दो सीटों पर सफलता मिली। वहीं बीजेडी और बीजेपी समर्थित एक निर्दलीय उम्मीदवार को एक-एक सीट मिली। चुनाव परिणाम ने कई राजनीतिक समीकरणों को उजागर कर दिया।

ओडिशा विधानसभा में कुल 147 विधायक हैं, जिनमें बीजेपी और उसके समर्थकों की संख्या 82 बताई जाती है। इसके बावजूद बीजेपी उम्मीदवार को 93 वोट मिले, जो अपेक्षित संख्या से 11 अधिक थे। इन अतिरिक्त वोटों में 8 बीजेडी और 3 कांग्रेस विधायकों के क्रॉस वोटिंग करने की बात सामने आई। यही कारण रहा कि बीजेडी ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए कड़ी कार्रवाई की।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम बीजेडी के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि पार्टी अपने भीतर अनुशासन बनाए रखने को लेकर बेहद सख्त है। साथ ही यह भी संकेत है कि आने वाले समय में पार्टी किसी भी प्रकार की बगावत या असंतोष को बर्दाश्त नहीं करेगी।

इस घटना के बाद ओडिशा की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चा भी तेज हो गई है। विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर बीजेडी पर निशाना साध सकते हैं, जबकि सत्ताधारी दल इसे अपनी मजबूती और अनुशासन का उदाहरण बता रहा है। आने वाले दिनों में इस फैसले का असर राज्य की राजनीति पर कितना पड़ता है, यह देखना दिलचस्प होगा।