शेयर बाजार में चौथे दिन गिरावट! कच्चा तेल $114 पार, स्विगी के शेयर 13% टूटे
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Indian Stock Market News
निफ्टी 50 में 0.70% और सेंसेक्स में 0.39% की गिरावट दर्ज हुई।
ब्रेंट क्रूड करीब 114 डॉलर प्रति बैरल पहुंचा, जिससे महंगाई की चिंता बढ़ी।
क्विक-कॉमर्स कारोबार और मुनाफे को लेकर चिंताओं के बीच शेयर करीब 13% गिरा।
Mumbai / भारतीय शेयर बाजार में आखिर अचानक बिकवाली क्यों बढ़ गई? शुरुआती तेजी के बाद सेंसेक्स और निफ्टी फिसल गए, कच्चा तेल 114 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया और स्विगी के शेयरों में भारी गिरावट आई। जानिए बाजार की इस हलचल के पीछे की वजह।
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट देखने को मिली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। हालांकि, आईटी शेयरों में तेजी ने बाजार को कुछ सहारा देने की कोशिश की, लेकिन प्रमुख सूचकांक शुरुआती बढ़त बरकरार नहीं रख सके।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार सुबह भारतीय समयानुसार 10 बजकर 13 मिनट पर निफ्टी 50 करीब 0.70 प्रतिशत गिरकर 22,529.15 पर आ गया। वहीं, सेंसेक्स 0.39 प्रतिशत की गिरावट के साथ 72,964.13 पर कारोबार कर रहा था। इससे पहले शुरुआती कारोबार में निफ्टी करीब 0.3 प्रतिशत और सेंसेक्स लगभग 0.6 प्रतिशत चढ़े थे, लेकिन बाद में बाजार की दिशा बदल गई।
पिछले तीन कारोबारी सत्रों में भी दोनों प्रमुख सूचकांक लगभग 2 प्रतिशत तक गिर चुके थे।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
बाजार में गिरावट की प्रमुख वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें बताई जा रही हैं। ब्रेंट क्रूड करीब 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। सऊदी अरब पर यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों के बाद ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ीं, जिसका असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ा।
एचएसटी वेल्थ के संस्थापक और सीईओ हरिसेलवन राधाकृष्णन के अनुसार, भारत के लिए 114 डॉलर के आसपास ब्रेंट क्रूड एक बड़ा जोखिम है। उन्होंने चेतावनी दी कि महंगा तेल केवल बाजार के सेंटीमेंट पर दबाव नहीं डालता, बल्कि महंगाई बढ़ा सकता है। इससे उपभोक्ताओं की खर्च करने की क्षमता और कंपनियों के मुनाफे पर भी असर पड़ सकता है।
आईटी शेयरों में तेजी, बाकी सेक्टरों पर दबाव
शुक्रवार को बाजार में व्यापक कमजोरी देखने को मिली। प्रमुख सेक्टरों में से 16 में 15 सेक्टर गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। स्मॉलकैप इंडेक्स लगभग 3.4 प्रतिशत और मिडकैप इंडेक्स करीब 2.5 प्रतिशत नीचे आ गए।
इसके उलट, निफ्टी आईटी इंडेक्स में लगभग 1 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। यह तेजी ऐसे समय आई, जब एशियाई टेक शेयरों में दबाव था और अमेरिकी बाजार में नैस्डैक कंपोजिट इंडेक्स पिछले सत्र में 2 प्रतिशत से अधिक गिर गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली के बीच भारतीय आईटी कंपनियों को अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। इसकी वजह यह है कि कंपनियों को एआई कंसल्टिंग, तकनीकी एकीकरण और मैनेज्ड सर्विसेज की जरूरत बढ़ सकती है। इन सेवाओं के लिए वैश्विक बड़ी टेक कंपनियों की तुलना में डेटा सेंटर और चिप्स पर उतना भारी शुरुआती निवेश जरूरी नहीं होता।
स्विगी के शेयरों में 13 प्रतिशत की गिरावट
शेयर बाजार की इस हलचल के बीच स्विगी के शेयरों में करीब 13 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। कई ब्रोकरेज कंपनियों ने उसके क्विक-कॉमर्स कारोबार में सुधार की क्षमता और फूड डिलीवरी व्यवसाय के मार्जिन को लेकर चिंताएं जताईं।
उधर, अमेरिकी बाजार में मेटा के शेयर भी लगभग 8 प्रतिशत गिर गए। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के एआई से जुड़े खर्चों के कारण एक दशक से अधिक समय में पहली बार नकदी का शुद्ध बहिर्वाह दर्ज हुआ।
कुल मिलाकर, महंगा कच्चा तेल, वैश्विक तनाव और कंपनियों के मुनाफे को लेकर चिंताओं ने भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाया है। आने वाले सत्रों में निवेशकों की नजर तेल की कीमतों, वैश्विक बाजारों और कंपनियों के प्रदर्शन पर रहेगी।
ऐसी ही महत्वपूर्ण बिजनेस और शेयर बाजार की खबरों के लिए देखते रहिए AGCNN NEWS। नमस्कार!