रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड: पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने गुरमीत राम रहीम को किया बरी, तीन दोषियों की उम्रकैद बरकरार

Sat 07-Mar-2026,11:16 AM IST +05:30

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रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड: पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने गुरमीत राम रहीम को किया बरी, तीन दोषियों की उम्रकैद बरकरार Ram Rahim Acquitted
  • छत्रपति हत्याकांड में गुरमीत राम रहीम को हाई कोर्ट से राहत, बरी।

  • तीन अन्य दोषियों कुलदीप, निर्मल और किशन लाल की उम्रकैद बरकरार।

  • 2002 में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की गोली मारकर हत्या हुई थी।

Delhi / Delhi :

Delhi / बहुचर्चित पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड मामले में शनिवार को एक अहम कानूनी मोड़ आया, जब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को इस मामले में बड़ी राहत देते हुए बरी कर दिया। हाई कोर्ट ने सीबीआई की विशेष अदालत के पहले के फैसले में आंशिक संशोधन करते हुए यह निर्णय सुनाया। हालांकि अदालत ने इस मामले में दोषी ठहराए गए अन्य तीन आरोपियों—कुलदीप, निर्मल और किशन लाल—की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है।

यह फैसला उन अपीलों पर सुनवाई के बाद आया, जो आरोपियों ने सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में दायर की थीं। अदालत ने मामले से जुड़े सभी साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और कानूनी दलीलों पर विस्तार से विचार करने के बाद अपना निर्णय सुनाया। कोर्ट ने कहा कि डेरा प्रमुख के खिलाफ अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए साक्ष्य इतने मजबूत नहीं हैं कि उनके खिलाफ आपराधिक साजिश में शामिल होने का आरोप संदेह से परे साबित किया जा सके। इसी आधार पर अदालत ने उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दिया।

हालांकि अदालत ने अन्य तीन दोषियों के मामले में अलग रुख अपनाया। कोर्ट ने पाया कि कुलदीप, निर्मल और किशन लाल के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्य और गवाहियों से उनकी भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आती है। अदालत के अनुसार, इन तीनों के खिलाफ ऐसे ठोस प्रमाण मौजूद हैं जो यह साबित करते हैं कि वे इस हत्या की साजिश और घटना में शामिल थे। इसी कारण हाई कोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को यथावत रखने का आदेश दिया।

दरअसल यह मामला पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या से जुड़ा है, जिसने उस समय पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था। रामचंद्र छत्रपति सिरसा से प्रकाशित होने वाले एक अखबार के संपादक थे। उन्होंने अपने अखबार में डेरा सच्चा सौदा से जुड़े कुछ गंभीर आरोपों को प्रकाशित किया था। इन आरोपों में डेरा के भीतर साध्वियों के साथ कथित यौन शोषण से संबंधित एक गुमनाम पत्र का खुलासा भी शामिल था। इस खबर के प्रकाशित होने के कुछ समय बाद, वर्ष 2002 में रामचंद्र छत्रपति को गोली मार दी गई थी। बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी।

इस घटना के बाद पूरे इलाके में भारी आक्रोश देखने को मिला था और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठी थी। इसके बाद जांच की जिम्मेदारी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई थी। लंबी जांच और सुनवाई के बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सहित अन्य आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसी फैसले के खिलाफ सभी दोषियों ने हाई कोर्ट में अपील की थी।

अब हाई कोर्ट के ताजा फैसले के बाद जहां गुरमीत राम रहीम को इस मामले में राहत मिली है, वहीं अन्य तीन दोषियों की सजा बरकरार रहने से यह मामला एक नए कानूनी पड़ाव पर पहुंच गया है।

हालांकि यह भी स्पष्ट है कि गुरमीत राम रहीम को केवल छत्रपति हत्याकांड मामले में ही राहत मिली है। वह अभी भी दो साध्वियों के साथ दुष्कर्म के मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद 20 साल की सजा काट रहा है। फिलहाल वह हरियाणा के रोहतक स्थित सुनारिया जेल में बंद है।