Defence News: 425 करोड़ रुपये के नौसैनिक जनरेटर सौदे पर हस्ताक्षर
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
Indian Navy News
भारतीय नौसेना के लिए 12 स्वदेशी मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर खरीदे जाएंगे।
425 करोड़ रुपये के अनुबंध पर रक्षा मंत्रालय और भारत फोर्ज के बीच हस्ताक्षर।
आत्मनिर्भर भारत और मेक-इन-इंडिया अभियान को मिलेगा बड़ा बढ़ावा।
Delhi / भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता को और मजबूत करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मंत्रालय ने लगभग 425 करोड़ रुपये की लागत से 12 मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर सेट (Marine Gas Turbine Generator Sets) की खरीद के लिए पुणे स्थित भारत फोर्ज लिमिटेड के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता 19 जून 2026 को नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में ‘बाय (इंडियन)’ श्रेणी के तहत संपन्न हुआ।
इन अत्याधुनिक जनरेटर सेटों की क्षमता 1.25 मेगावाट होगी और इनमें कम से कम 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया जाएगा। इस परियोजना को आत्मनिर्भर भारत और मेक-इन-इंडिया अभियान की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे रक्षा क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और रणनीतिक तकनीकों में भारत की आत्मनिर्भरता और मजबूत होगी।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह अनुबंध केवल उपकरणों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि समुद्री गैस टर्बाइन जनरेटरों के स्वदेशी निर्माण की क्षमता विकसित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है। अब तक इस तरह की कई महत्वपूर्ण तकनीकों के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भरता बनी हुई थी, लेकिन इस परियोजना के जरिए भारत घरेलू स्तर पर उन्नत समुद्री ऊर्जा प्रणालियों के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ेगा।
मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर आधुनिक नौसैनिक युद्धपोतों का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। ये जहाजों पर स्थापित युद्ध प्रणालियों, उन्नत हथियारों, रडार, सेंसर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को आवश्यक विद्युत शक्ति उपलब्ध कराते हैं। ऐसे में इन जनरेटरों की विश्वसनीयता और क्षमता सीधे तौर पर नौसेना की युद्धक तैयारी और परिचालन दक्षता से जुड़ी होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी उत्पादन के कारण इन प्रणालियों के रखरखाव, मरम्मत और जीवनचक्र समर्थन में भी आसानी होगी। इससे समय और लागत दोनों की बचत होगी तथा विदेशी आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता कम होगी।
रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह परियोजना भारत के रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करने के साथ-साथ देश में उच्च तकनीक विनिर्माण को भी प्रोत्साहित करेगी। इसके माध्यम से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और रक्षा क्षेत्र में निजी उद्योगों की भागीदारी को भी बढ़ावा मिलेगा।
कुल मिलाकर, 425 करोड़ रुपये का यह अनुबंध भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने, रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने और भारत को रक्षा तकनीक के क्षेत्र में अधिक सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।