Indian Army Eye Camp: 2,500 मरीजों की जांच, सैकड़ों को मिली नई रोशनी

Fri 19-Jun-2026,09:17 PM IST +05:30

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Indian Army Eye Camp: 2,500 मरीजों की जांच, सैकड़ों को मिली नई रोशनी Operation Drishti
  • ऑपरेशन दृष्टि के तहत 2,500 से अधिक मरीजों की जांच की गई।

  • 300 से ज्यादा नेत्र सर्जरी और 260 से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन सफल रहे।

  • 100 से अधिक आदिवासी मरीजों को उन्नत नेत्र चिकित्सा सेवाओं का लाभ मिला।

Jharkhand / Ranchi :

Ranchi / भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना की संयुक्त चिकित्सा टीम ने झारखंड की राजधानी रांची के नामकुम स्थित सैन्य अस्पताल में 15 से 19 जून 2026 तक ‘ऑपरेशन दृष्टि’ के तहत नौवें मेगा नेत्र शल्य चिकित्सा शिविर का सफल आयोजन किया। इस पांच दिवसीय शिविर ने न केवल हजारों लोगों को बेहतर नेत्र चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराईं, बल्कि सैकड़ों मरीजों की आंखों की रोशनी भी वापस लौटाई।

शिविर के दौरान 2,500 से अधिक मरीजों की आंखों की जांच की गई, जबकि 300 से अधिक सर्जिकल प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक संपन्न की गईं। इनमें 260 से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन शामिल रहे। विशेष बात यह रही कि 100 से अधिक वंचित आदिवासी मरीजों को इस शिविर का सीधा लाभ मिला। इसके अलावा एडवांस्ड मिनिमली इनवेसिव ग्लूकोमा सर्जरी (MIGS), डायबिटिक रेटिनोपैथी के उपचार और दृष्टि बचाने वाले एंटी-VEGF इंजेक्शन जैसी आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं भी प्रदान की गईं।

समापन समारोह में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे “सेवा परमो धर्मः” की भावना का जीवंत उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार नहीं है, बल्कि सेना चिकित्सा कोर की विशेषज्ञता, समर्पण और मानवीय सेवा भावना का भी परिचायक है। उन्होंने बताया कि ‘ऑपरेशन दृष्टि’ के तहत अब तक देशभर में 75,000 से अधिक लोगों की जांच की जा चुकी है और 3,000 से ज्यादा दृष्टि बहाल करने वाली सर्जरी सफलतापूर्वक की गई हैं।

इस शिविर में कई प्रेरणादायक कहानियां भी सामने आईं। बिहार रेजिमेंट के दिवंगत पूर्व हवलदार जॉन ऑगस्टस एक्का की 68 वर्षीय पत्नी श्रीमती एक्का लंबे समय से मोतियाबिंद से पीड़ित थीं। उनकी दाहिनी आंख की रोशनी काफी कम हो चुकी थी। शिविर में सफल फेकोइमल्सीफिकेशन और इंट्राओकुलर लेंस प्रत्यारोपण के बाद उनकी दृष्टि वापस लौट आई।

इसी तरह रांची की 63 वर्षीय आदिवासी महिला एलिजा बेथ और झारखंड के 50 वर्षीय आदिवासी निवासी अशोक देशमुख को भी इस शिविर में आधुनिक नेत्र चिकित्सा सुविधाएं मिलीं। दोनों का सफल मोतियाबिंद ऑपरेशन किया गया। खास बात यह रही कि उनका सेना से कोई संबंध नहीं था, फिर भी उन्हें समान स्तर की उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराई गई।

इस अभियान का उद्घाटन 15 जून को महानिदेशक सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा (DGAFMS) वाइस एडमिरल आरती सरीन ने किया था। वहीं पूरे शल्य चिकित्सा अभियान का नेतृत्व दिल्ली कैंट स्थित आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) के नेत्र विज्ञान विभागाध्यक्ष ब्रिगेडियर (डॉ.) संजय कुमार मिश्रा ने किया।

दिसंबर 2024 में देहरादून से शुरू हुआ ‘ऑपरेशन दृष्टि’ अब देश के विभिन्न हिस्सों—जयपुर, बागडोगरा, उधमपुर, लक्षद्वीप, भुज, गोरखपुर और लेह-लद्दाख—तक पहुंच चुका है। रांची इसका नौवां केंद्र बना है। यह पहल आज भारत के सबसे बड़े और प्रभावशाली सैन्य चिकित्सा जन-सेवा अभियानों में से एक के रूप में पहचान बना चुकी है।