Rajnath Singh in Nagpur: रक्षा और एयरोस्पेस सेक्टर को मिलेगी नई शक्ति

Thu 18-Jun-2026,11:55 PM IST +05:30

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Rajnath Singh in Nagpur: रक्षा और एयरोस्पेस सेक्टर को मिलेगी नई शक्ति Nagpur News
  • नागपुर में 10,000 टन क्षमता वाली एल्युमीनियम एक्सट्रूज़न प्रेस मशीन का भूमि पूजन।

  • रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए स्वदेशी उत्पादन क्षमता में होगा बड़ा विस्तार।

  • आयात निर्भरता कम कर आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिलेगी मजबूती।

Maharashtra / Nagpur :

Nagpur / भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को नई मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह 19 जून, 2026 को महाराष्ट्र के नागपुर स्थित अंबाझारी आयुध कारखाने में अत्याधुनिक 10,000 टन क्षमता वाली एल्युमीनियम एक्सट्रूज़न प्रेस मशीन के लिए भूमि पूजन करेंगे। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, रक्षा उत्पादन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और यंत्र इंडिया लिमिटेड (YIL) के अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।

यह परियोजना देश के रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। प्रस्तावित एक्सट्रूज़न प्रेस मशीन अत्याधुनिक तकनीक से लैस होगी और बड़े आकार के, उच्च गुणवत्ता वाले तथा अत्यधिक सटीक एल्युमीनियम मिश्र धातु एक्सट्रूज़न के निर्माण में सक्षम होगी। इन उत्पादों का उपयोग रक्षा उपकरणों, सैन्य प्लेटफॉर्म, मिसाइल प्रणालियों, विमानन संरचनाओं और एयरोस्पेस परियोजनाओं में किया जाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान समय में कई महत्वपूर्ण एल्युमीनियम एक्सट्रूडेड घटकों के लिए भारत को आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। नई मशीन के स्थापित होने के बाद देश में ही इन महत्वपूर्ण उत्पादों का निर्माण संभव हो सकेगा। इससे न केवल विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी।

यह परियोजना केंद्र सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देना और भारत को वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है। इससे देश की तकनीकी क्षमता मजबूत होगी और स्थानीय उद्योगों को भी नए अवसर प्राप्त होंगे।

नागपुर में स्थापित होने वाली यह अत्याधुनिक मशीन आने वाले वर्षों में रक्षा उत्पादन क्षेत्र के लिए एक राष्ट्रीय संपत्ति साबित हो सकती है। इसके माध्यम से भारत रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों को अधिक प्रभावी ढंग से पूरा कर सकेगा और स्वदेशी तकनीक के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल करेगा।