रामकृष्ण हेगड़े की 100वीं जयंती पर उपराष्ट्रपति ने दी श्रद्धांजलि, सुशासन की विरासत को किया याद
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Hegde Birth Centenary
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने रामकृष्ण हेगड़े को श्रद्धांजलि दी।
विकेंद्रीकरण, सुशासन और जवाबदेही में हेगड़े के योगदान को याद किया गया।
युवाओं से ईमानदारी, जनसेवा और राष्ट्र प्रथम की भावना अपनाने की अपील हुई।
Bengaluru / उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने बेंगलुरु स्थित विधान सौध में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ राजनेता रामकृष्ण हेगड़े की 100वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने हेगड़े को महान राजनेता, राष्ट्रवादी और नेताओं का निर्माण करने वाला व्यक्तित्व बताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में कर्नाटक ने शासन-व्यवस्था के क्षेत्र में देश के सामने एक आदर्श स्थापित किया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि रामकृष्ण हेगड़े की राजनीतिक विरासत का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष विकेंद्रीकरण और स्थानीय शासन को मजबूत करना था। उन्होंने ‘कर्नाटक जिला परिषद, तालुक पंचायत समिति, मंडल पंचायत और न्याय पंचायत अधिनियम, 1985’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पहल ने शासन को आम लोगों के और करीब पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में 73वें संविधान संशोधन के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा मिलने से इसी दृष्टिकोण को और मजबूती मिली।
सी. पी. राधाकृष्णन ने हेगड़े से जुड़ी एक निजी स्मृति भी साझा की। उन्होंने बताया कि हेगड़े पैसे की एक सरल परिभाषा देते थे—अच्छा घर, अच्छी सेहत, अच्छी शिक्षा और अच्छी कार के साथ आरामदायक जीवन। उनका सवाल होता था, “पैसा इससे ज़्यादा और क्या है?” उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह सोच हेगड़े की सादगी और जीवन के प्रति उनके व्यावहारिक दृष्टिकोण को दर्शाती है।
जवाबदेही और मजबूत संस्थाओं पर जोर
उपराष्ट्रपति ने सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कर्नाटक में लोकायुक्त को मजबूत किए जाने को याद करते हुए कहा कि सार्वजनिक पद केवल अधिकार का नहीं, बल्कि जनता के विश्वास की जिम्मेदारी संभालने का दायित्व है।
उन्होंने रामकृष्ण हेगड़े की उस सोच को भी रेखांकित किया कि मजबूत राज्य ही मजबूत भारत का आधार बनते हैं। मजबूत स्थानीय सरकारें राज्यों को सशक्त बनाती हैं और सशक्त नागरिक स्थानीय सरकारों को मजबूत करते हैं। इस दृष्टिकोण को लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने हेगड़े के योगदान को याद किया।
सी. पी. राधाकृष्णन ने रामकृष्ण हेगड़े को केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि संस्थाओं और नेताओं का निर्माता बताया। उन्होंने कहा, “महान नेता एक पल को बदल सकते हैं। महान संस्था-निर्माता पीढ़ियों को बदल देते हैं।” उनके मुताबिक हेगड़े की सबसे बड़ी विरासत उनकी संस्थागत सोच और ऐसी व्यवस्था बनाने का प्रयास थी, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उपयोगी साबित हो।
युवाओं से हेगड़े के आदर्श अपनाने की अपील
उपराष्ट्रपति ने युवा पीढ़ी से रामकृष्ण हेगड़े की ईमानदारी, साहस और जनसेवा के प्रति समर्पण को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को आगे बढ़ाना ही हेगड़े की विरासत के प्रति सबसे सार्थक श्रद्धांजलि होगी।
कार्यक्रम में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार, भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू, केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। रामकृष्ण हेगड़े के परिवार के सदस्यों और उनके मित्रों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान हेगड़े के राजनीतिक जीवन, सुशासन, विकेंद्रीकरण, जवाबदेही और संस्थागत निर्माण में योगदान को याद किया गया। उपराष्ट्रपति के संदेश में विशेष रूप से यह बात सामने आई कि लोकतंत्र की मजबूती केवल बड़े राजनीतिक फैसलों से नहीं, बल्कि मजबूत स्थानीय संस्थाओं, जवाबदेह शासन और जागरूक नागरिकों से होती है।