Swaminarayan Temple Prayagraj | प्रयागराज स्वामीनारायण मंदिर की 3 मंजिला इमारत गिरी, बड़ा हादसा टला

Sat 29-Aug-2026,03:05 PM IST +05:30

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Swaminarayan Temple Prayagraj | प्रयागराज स्वामीनारायण मंदिर की 3 मंजिला इमारत गिरी, बड़ा हादसा टला Prayagraj Temple Collapse
  • प्रयागराज में हादसा: स्वामीनारायण मंदिर परिसर की तीन मंजिला इमारत अचानक ढह गई।

  • बड़ा हादसा टला: इमारत पहले ही खाली करा दी गई थी, इसलिए कोई जनहानि नहीं हुई।

  • नींव कमजोर होने की आशंका: निर्माण स्थल पर जमा पानी को संभावित वजह माना जा रहा है।

Uttar Pradesh / Prayagraj (Allahabad) :

Prayagraj / उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में शुक्रवार देर रात एक बड़ा हादसा होने से टल गया। जॉर्ज टाउन इलाके में स्थित स्वामीनारायण मंदिर परिसर की तीन मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। इमारत के गिरने के समय उसके अंदर कोई मौजूद नहीं था, जिसके कारण किसी की मौत या घायल होने की सूचना नहीं है। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे परिसर का निरीक्षण किया।

मंदिर परिसर में स्थित यह इमारत केपी कॉलेज के सामने बनी हुई थी। मंदिर प्रशासन के अनुसार, इसका इस्तेमाल धर्मशाला के तौर पर किया जाता था। यहां खास तौर पर दक्षिण भारत से प्रयागराज आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था की जाती थी। इमारत में कुल 12 कमरे थे।

मंदिर के प्रशासनिक प्रमुख यानी ‘कोठारी’ कमलेश भगत ने बताया कि इमारत के पीछे निर्माण कार्य चल रहा था। निर्माण के लिए खोदे गए एक गड्ढे में लंबे समय से पानी भरा हुआ था। मंदिर प्रशासन ने आशंका जताई कि पानी के कारण इमारत की नींव कमजोर हो गई होगी, जिसके चलते यह हादसा हुआ। हालांकि, अधिकारियों की जांच पूरी होने के बाद ही इमारत गिरने की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

बताया गया कि इमारत में हादसे से पहले ही दरारें दिखाई देने लगी थीं। स्थिति को देखते हुए करीब एक सप्ताह पहले ही इमारत को खाली करा लिया गया था और उसे बंद कर दिया गया था। यही वजह रही कि शुक्रवार रात जब इमारत तेज आवाज के साथ ढही, तब अंदर कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था।

इमारत गिरने की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोग घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए। सूचना मिलते ही पुलिस और संबंधित विभागों के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण करते हुए स्थिति का जायजा लिया और आवश्यक सुरक्षा उपाय किए।

घटना के बाद राहत और बचाव से जुड़ी टीमें भी मौके पर पहुंचीं। हालांकि, जांच में यह स्पष्ट हो गया कि इमारत पहले से ही खाली कराई जा चुकी थी। इसलिए मलबे में किसी व्यक्ति के दबे होने की आशंका नहीं थी। फिलहाल प्रशासन की ओर से मामले की जांच की जा रही है।

मंदिर प्रशासन के मुताबिक, इमारत में दरारें आने के बाद उसे बंद करने का फैसला पहले ही लिया जा चुका था। ऐसे में इमारत के गिरने से संभावित बड़े हादसे को टालने में मदद मिली। अगर इमारत में श्रद्धालु या कर्मचारी मौजूद होते, तो स्थिति गंभीर हो सकती थी।

प्रयागराज में हुई इस घटना ने निर्माण कार्यों के दौरान आसपास की पुरानी इमारतों की सुरक्षा और उनकी नींव की मजबूती को लेकर सवाल खड़े किए हैं। खासकर उन स्थानों पर जहां गहरी खुदाई या लंबे समय तक पानी जमा रहने की स्थिति हो, वहां आसपास की इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा महत्वपूर्ण मानी जाती है।

फिलहाल प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि तीन मंजिला इमारत की नींव कमजोर होने के पीछे पानी और निर्माण कार्य कितना जिम्मेदार था। संबंधित विभागों द्वारा परिसर और आसपास के क्षेत्र की स्थिति की भी जांच की जा रही है। फिलहाल सबसे राहत की बात यही है कि हादसे के समय इमारत पूरी तरह खाली थी और किसी तरह की जनहानि नहीं हुई।