Weak Monsoon Concern: शिवराज सिंह चौहान ने खरीफ तैयारियों की समीक्षा की
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Weak Monsoon Concern
315 संभावित प्रभावित जिलों के लिए विशेष कृषि आकस्मिकता योजना तैयार।
जल संरक्षण, वैकल्पिक फसल और फसल विविधीकरण पर विशेष जोर।
किसानों को बीज, उर्वरक और वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराने की तैयारी।
Delhi / अल नीनो और कमजोर मानसून की संभावित स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में राज्यों के कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों, आईसीएआर, आईएमडी और जिला प्रशासन के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर स्थिति का आकलन किया। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर हर चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इस वर्ष मानसून सामान्य से काफी पीछे चल रहा है और अब तक वर्षा में लगभग 43 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आगामी दिनों में भी कई क्षेत्रों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है। इसका सीधा असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है, विशेषकर उन इलाकों में जहां खेती मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कृषि मंत्रालय और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने देश के 315 संभावित प्रभावित जिलों की पहचान की है। इनमें 111 जिले अत्यधिक संवेदनशील श्रेणी में रखे गए हैं, जहां सिंचाई सुविधाएं बेहद सीमित हैं। सरकार ने इन जिलों के लिए विशेष निगरानी और राहत रणनीति तैयार की है।
कृषि मंत्री ने बताया कि सभी जिलों के लिए जिला कृषि आकस्मिकता योजनाएं (DACP) तैयार कर ली गई हैं। इन योजनाओं में कम बारिश की स्थिति में वैकल्पिक फसलें, फसल परिवर्तन, जल प्रबंधन और किसानों की आय सुरक्षित रखने के उपाय शामिल हैं। राज्यों और जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि इन योजनाओं को केवल दस्तावेज़ न मानकर जरूरत पड़ने पर तुरंत लागू करने योग्य कार्ययोजना के रूप में तैयार रखें।
जल संरक्षण को सरकार ने सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। तालाबों, जलाशयों, चेक डैम, खेत-तालाब और अन्य जल संरचनाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। मनरेगा और ग्रामीण विकास योजनाओं के माध्यम से जल संचयन कार्यों को भी गति दी जाएगी ताकि भविष्य की चुनौतियों का सामना किया जा सके।
फसल रणनीति के तहत कम अवधि और कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। दलहन, तिलहन और मोटे अनाज जैसी फसलों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है। साथ ही किसानों को फसल विविधीकरण और मिश्रित खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे जोखिम कम हो सके।
सरकार ने बीज और उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का दावा किया है। संभावित प्रभावित जिलों के लिए अतिरिक्त बीज भंडार सुरक्षित रखा गया है ताकि आवश्यकता पड़ने पर पुनर्बुवाई में कोई समस्या न आए। इसके अलावा कृषि विज्ञान केंद्रों, डिजिटल प्लेटफॉर्म, एसएमएस, व्हाट्सएप और मौसम सलाह सेवाओं के माध्यम से किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाई जाएगी।
शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से अपील की कि वे घबराएं नहीं और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती करें। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, वैज्ञानिक संस्थान और किसान मिलकर काम करेंगे तो अल नीनो जैसी चुनौती को भी अवसर में बदला जा सकता है। सरकार का लक्ष्य किसानों की आय, कृषि उत्पादन और देश की खाद्य सुरक्षा को हर हाल में सुरक्षित रखना है।