India Agriculture News: कृषि क्षेत्र में बदलाव के लिए अंतर-मंत्रालयी मंथन

Tue 23-Jun-2026,10:27 PM IST +05:30

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India Agriculture News: कृषि क्षेत्र में बदलाव के लिए अंतर-मंत्रालयी मंथन Agriculture Transformation Summit
  • कृषि सुधारों और किसानों की समृद्धि के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मंथन।

  • एग्रीस्टैक, फार्मर आईडी और कृषि निर्यात बढ़ाने पर जोर।

  • सुझावों के क्रियान्वयन के लिए विशेष टीम और समयबद्ध कार्ययोजना बनेगी।

Delhi / Delhi :

Delhi / केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र को अधिक आधुनिक, लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। नई दिल्ली के कृषि भवन में आयोजित "भारत की कृषि का रूपांतरण - अंतर-मंत्रालयी सम्मेलन" में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों और कृषि विशेषज्ञों के साथ व्यापक चर्चा की। इस बैठक का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादन को मजबूत करने और विकसित भारत के लक्ष्य को गति देना था।

सम्मेलन में बोलते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की गई हैं, लेकिन अब सबसे बड़ी जरूरत इन योजनाओं को प्रभावी ढंग से जमीन पर लागू करने की है। उन्होंने कहा कि केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके परिणाम किसानों तक पहुंचने चाहिए।

कृषि मंत्री ने "होल ऑफ गवर्नमेंट" और "होल वैल्यू चेन" दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। उनका कहना था कि कृषि, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे सभी क्षेत्रों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना जरूरी है, ताकि किसानों को उत्पादन से लेकर बाजार तक हर स्तर पर लाभ मिल सके।

बैठक में फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने पर भी विशेष चर्चा हुई। शिवराज सिंह चौहान ने उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार की प्रसिद्ध लीची सहित कई कृषि उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने और क्लस्टर आधारित विकास मॉडल को मजबूत करने के लिए कार्य किया जा रहा है। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने और नुकसान कम होने की संभावना बढ़ेगी।

तकनीक के उपयोग को लेकर भी मंत्री ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि एग्रीस्टैक और फार्मर आईडी जैसी डिजिटल पहलें कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती हैं, लेकिन इन्हें भूमि रिकॉर्ड से पूरी तरह जोड़ना आवश्यक है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक का उपयोग मानवीय दृष्टिकोण के साथ होना चाहिए ताकि किसानों को वास्तविक लाभ मिल सके।

पूर्वोत्तर भारत की कृषि संभावनाओं पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में अदरक, हल्दी, कंद और विशेष किस्म की मिर्च जैसी फसलों की अपार संभावनाएं हैं। इन उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए जल्द ही पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों और कृषि मंत्रियों के साथ विशेष बैठक आयोजित की जाएगी।

सम्मेलन में प्राप्त सुझावों को लागू करने के लिए उन्हें शॉर्ट-टर्म, मीडियम-टर्म और लॉन्ग-टर्म श्रेणियों में विभाजित करने का निर्णय लिया गया। साथ ही एक विशेष टीम गठित करने की घोषणा की गई, जो हर महीने इन योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करेगी।

जलवायु परिवर्तन और संभावित अल नीनो जैसी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत के पास पर्याप्त खाद्यान्न भंडार है और बेहतर रणनीति के जरिए हर चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। उन्होंने सभी हितधारकों से मिलकर काम करने का आह्वान करते हुए कहा कि किसानों की समृद्धि ही विकसित भारत की सबसे मजबूत नींव बनेगी।