Defence News: स्वदेशी चिप निर्माण और डेटा सुरक्षा पर बड़ा मंथन

Tue 23-Jun-2026,11:01 PM IST +05:30

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Defence News: स्वदेशी चिप निर्माण और डेटा सुरक्षा पर बड़ा मंथन DITCC Meeting Highlights
  • रक्षा क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता और स्वदेशी नवाचार पर जोर।

  • स्वदेशी चिप निर्माण, संप्रभु ऑपरेटिंग सिस्टम और डेटा सुरक्षा पर चर्चा।

  • रक्षा और राष्ट्रीय तकनीकी विकास को गति देने वाली परियोजनाओं को मंजूरी।

Delhi / Delhi :

Delhi / रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ की अध्यक्षता में नई दिल्ली में रक्षा सूचना प्रौद्योगिकी सलाहकार समिति (DITCC) की 15वीं बैठक आयोजित की गई। मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ (HQ IDS) द्वारा आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में देश की रक्षा क्षमताओं को तकनीकी रूप से और अधिक मजबूत बनाने तथा सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक में युद्ध के बदलते स्वरूप और आधुनिक तकनीकों की बढ़ती भूमिका को ध्यान में रखते हुए कई अहम विषयों पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने रक्षा सेवाओं में उभरती और विघटनकारी प्रौद्योगिकियों के उपयोग से जुड़े नीतिगत पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। इस दौरान यह भी चर्चा हुई कि भविष्य के युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा प्रबंधन और उन्नत डिजिटल प्रणालियां भी निर्णायक भूमिका निभाएंगी।

समिति के सदस्यों ने उन्नत चिप निर्माण के स्वदेशीकरण को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका मानना है कि रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण तकनीकों के लिए विदेशी निर्भरता कम करना राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही देश में संप्रभु ऑपरेटिंग सिस्टम और स्वदेशी डेटाबेस विकसित करने पर भी विचार-विमर्श किया गया, ताकि संवेदनशील रक्षा डेटा की सुरक्षा और नियंत्रण पूरी तरह भारत के हाथों में रहे।

बैठक में रक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप डेटा सेंटरों के रणनीतिक स्थान निर्धारण पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए डेटा भंडारण और प्रबंधन की संरचना को और अधिक सुरक्षित, मजबूत तथा आधुनिक बनाया जाना चाहिए।

इस दौरान कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी भी दी गई। इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल रक्षा बलों की क्षमताओं को बढ़ाना नहीं है, बल्कि देश के समग्र तकनीकी विकास को भी गति देना है। समिति का मानना है कि रक्षा क्षेत्र में विकसित होने वाली अत्याधुनिक तकनीकों का लाभ भविष्य में अन्य सरकारी और नागरिक क्षेत्रों को भी मिलेगा।

बैठक में सेना, नौसेना, वायु सेना, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, शिक्षण संस्थानों तथा उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने रक्षा क्षेत्र में नवाचार, अनुसंधान और स्वदेशी तकनीकी विकास को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर सहमति जताई।

रक्षा मंत्रालय का मानना है कि आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में रक्षा तकनीक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। इसी दिशा में यह बैठक देश की रक्षा तैयारियों को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप मजबूत बनाने की एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।