सही जांच से बेहतर इलाज की ओर एक बड़ा कदम: इंदौर में काहो डायग्नोस्टिकॉन 2026

Fri 23-Jan-2026,07:13 PM IST +05:30

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सही जांच से बेहतर इलाज की ओर एक बड़ा कदम: इंदौर में काहो डायग्नोस्टिकॉन 2026 Indore Mahu Cantonment
  • महू छावनी क्षेत्र में दूषित पानी से बीमारियां फैलने की आशंका.

  • कलेक्टर शिवम वर्मा ने अस्पताल पहुंचकर मरीजों का हाल जाना.

  • स्वास्थ्य विभाग की टीमें तैनात, डोर-टू-डोर सर्वे शुरू.

Madhya Pradesh / Indore :

Indore / मध्य प्रदेश पहली बार देश की सबसे प्रतिष्ठित डायग्नोस्टिक कॉन्फ्रेंस काहो डायग्नोस्टिकॉन 2026 की मेज़बानी करने जा रहा है। 24 और 25 जनवरी, 2026 को लोकमाता देवी अहिल्या सभागृह (डीएवीवी), इंदौर में आयोजित होने वाला यह दो दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन भारत में स्वास्थ्य जाँच, डायग्नोस्टिक्स की गुणवत्ता, पेशेंट सेफ्टी और अत्याधुनिक तकनीकों पर केंद्रित रहेगा। यह कॉन्फ्रेंस मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य सेवा संगठनों के संघ (काहो/CAHO) के डायग्नोस्टिक्स डिवीजन द्वारा आयोजित की जा रही है और अपने पाँचवें संस्करण में प्रवेश कर रही है।

क्यों ज़रूरी है डायग्नोस्टिक्स पर यह राष्ट्रीय संवाद
आज की आधुनिक हेल्थकेयर व्यवस्था में डायग्नोस्टिक्स की भूमिका बेहद निर्णायक हो चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार, करीब 70 प्रतिशत मेडिकल फैसले जाँच रिपोर्ट्स पर आधारित होते हैं। ऐसे में अगर जाँच सही, समय पर और विश्वसनीय न हो, तो इलाज की दिशा भी प्रभावित होती है। बढ़ती आबादी, बदलती जीवनशैली, नई बीमारियों के उभरने और समय पर इलाज की बढ़ती आवश्यकता ने एक मज़बूत, सुरक्षित और मानकीकृत डायग्नोस्टिक सिस्टम की मांग को और भी ज़रूरी बना दिया है। काहो डायग्नोस्टिकॉन 2026 इसी ज़रूरत का उत्तर है।

मध्य प्रदेश में पहली बार, इंदौर को मिला गौरव
यह कॉन्फ्रेंस मध्य प्रदेश में पहली बार आयोजित हो रही है, जो राज्य के हेल्थकेयर इकोसिस्टम के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इंदौर जैसे उभरते मेडिकल और एजुकेशनल हब में इस स्तर का आयोजन होना इस बात का संकेत है कि अब डायग्नोस्टिक सेवाओं को केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि दूसरे और तीसरे स्तर के शहरों को भी राष्ट्रीय मंच पर लाया जा रहा है।

पेशेंट सेफ्टी पर विशेष फोकस
काहो की पहचान हमेशा से क्वालिटी और पेशेंट सेफ्टी रही है। इस कॉन्फ्रेंस में भी मरीजों की सुरक्षा को केंद्रीय विषय बनाया गया है। काहो एक गैर-लाभकारी संगठन है, जो अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटर्स को पेशेंट सेफ्टी से जुड़ी ट्रेनिंग पूरी तरह निःशुल्क प्रदान करता है। संगठन का स्पष्ट मानना है कि सुरक्षित जाँच प्रक्रियाएँ ही भरोसेमंद इलाज की नींव होती हैं। काहो यह भी आश्वासन देता है कि हर अस्पताल में डायग्नोस्टिक पेशेंट सेफ्टी की ट्रेनिंग मुफ्त दी जाएगी, ताकि देशभर में मरीजों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ मिल सकें।

रिकॉर्ड रजिस्ट्रेशन, देशभर से सहभागिता
काहो डायग्नोस्टिकॉन 2026 को लेकर देशभर में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला है। अब तक 1600 से अधिक रजिस्ट्रेशन पूरे भारत से प्राप्त हो चुके हैं। यह आंकड़ा खुद इस बात का प्रमाण है कि डायग्नोस्टिक सेक्टर के प्रोफेशनल्स इस मंच को कितना महत्वपूर्ण मानते हैं। यह कॉन्फ्रेंस डायग्नोस्टिक के सभी विंग्स — लैब मेडिसिन, रेडियोलॉजी, मॉलीक्यूलर डायग्नोस्टिक्स, क्वालिटी मैनेजमेंट और टेक्नोलॉजी — के लिए खुली है, ताकि हर क्षेत्र से जुड़े लोग यहाँ सीख सकें और अपने अनुभव साझा कर सकें।

विशेषज्ञों की मौजूदगी, ज्ञान का आदान-प्रदान
कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ. विनीता कोठारी (सेक्रेटरी, डायग्नोस्टिक डिवीजन, CAHO), डॉ. डी. पी. लोकवानी (फाउंडर वाइस चांसलर, एमपी मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी एवं डायरेक्टर, सुख सागर मेडिकल कॉलेज, जबलपुर) और डॉ. अपर्णा जयराम (चेयरमैन, डायग्नोस्टिक डिवीजन, CAHO) ने मीडिया को संबोधित करते हुए आयोजन के उद्देश्यों और इसके दूरगामी प्रभावों पर प्रकाश डाला। उनका कहना है कि यह कॉन्फ्रेंस केवल ज्ञान साझा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डायग्नोस्टिक्स में वास्तविक सुधार और बदलाव का मंच है।

काहो: गुणवत्ता और सुरक्षा का भरोसेमंद नाम
मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य सेवा संगठनों का संघ (काहो) एक प्रमुख गैर-लाभकारी संस्था है, जो देशभर के अस्पतालों, डायग्नोस्टिक सेंटर्स और क्वालिटी प्रोफेशनल्स के साथ मिलकर काम करती है। ट्रेनिंग प्रोग्राम्स, क्षमता निर्माण और बेहतर कार्यप्रणालियों के जरिए काहो लगातार स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा को मजबूत कर रहा है। खासतौर पर जमीनी और संस्थागत स्तर पर काम करते हुए काहो भारत की हेल्थकेयर व्यवस्था को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

कॉन्फ्रेंस की थीम और राष्ट्रीय स्वास्थ्य दृष्टि
काहो डायग्नोस्टिकॉन 2026 की थीम है —
“नैदानिक उत्कृष्टता के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा को सशक्त बनाना”।
यह थीम आयुष्मान भारत, यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज, डिजिटल हेल्थ मिशन और आत्मनिर्भर भारत जैसी भारत सरकार की प्रमुख स्वास्थ्य पहलों से सीधा जुड़ाव रखती है। कॉन्फ्रेंस इस बात पर ज़ोर देती है कि कैसे सही और समय पर जाँच न केवल इलाज को बेहतर बनाती है, बल्कि बीमारी की रोकथाम और हर नागरिक तक भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने में भी अहम भूमिका निभाती है।

राष्ट्रीय मंच, व्यापक सहभागिता
इस आयोजन में 1500 से अधिक हेल्थकेयर और डायग्नोस्टिक प्रोफेशनल्स, 100 से ज्यादा एक्सपर्ट फैकल्टी और स्पीकर्स, और 70 से अधिक इंडस्ट्री एग्ज़िबिटर्स व पार्टनर्स हिस्सा लेंगे। यह मंच ज्ञान, अनुभव और नवाचार को साझा करने का एक सशक्त अवसर बनेगा। लैब एक्सपर्ट्स, रेडियोलॉजिस्ट, पॉलिसी मेकर्स, रेगुलेटर्स, शिक्षाविद और इंडस्ट्री लीडर्स एक साथ मिलकर डायग्नोस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियों और समाधानों पर मंथन करेंगे।

टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और एक्सपो
काहो डायग्नोस्टिकॉन 2026 में मेगा डायग्नोस्टिक एक्सपो, प्री-कॉन्फ्रेंस प्रैक्टिकल वर्कशॉप्स और लाइव टेक्नोलॉजी डेमो भी आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों के जरिए नई और एडवांस्ड जाँच तकनीकों को सामने लाया जाएगा, देश में हो रहे रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा और मेडटेक व डायग्नोस्टिक्स स्टार्टअप्स को सपोर्ट किया जाएगा। इसका उद्देश्य भारत को किफायती और उच्च गुणवत्ता वाली डायग्नोस्टिक सॉल्यूशंस का वैश्विक केंद्र बनाना है।

प्रतिष्ठित अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस कॉन्फ्रेंस में मध्य प्रदेश के माननीय स्वास्थ्य मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ला, लोकसभा सांसद श्री शंकर लालवानी, एनएबीएल के डॉ. संदीप शाह, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर राकेश सिंघाई और अमलतास मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के अध्यक्ष श्री मयंकराज भदोरिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। उनकी उपस्थिति इस आयोजन को और भी प्रेरणादायक बनाएगी।

सिर्फ कॉन्फ्रेंस नहीं, एक राष्ट्रीय पहल
हैदराबाद, कोलकाता और दिल्ली में सफल आयोजनों की विरासत को आगे बढ़ाते हुए, इंदौर में होने वाला काहो डायग्नोस्टिकॉन 2026 अपने स्तर, प्रभाव और राष्ट्रीय महत्व के लिहाज से एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होने जा रहा है। यह सिर्फ एक पेशेवर कॉन्फ्रेंस नहीं, बल्कि भारत में स्वास्थ्य निदान के भविष्य को दिशा देने वाली एक राष्ट्रीय पहल है, जो एक समावेशी, सुदृढ़ और उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की नींव को और मजबूत करती है।