पश्चिमी सिंहभूम में बड़ी नक्सल विरोधी कार्रवाई: 1 करोड़ का इनामी नक्सली अनल समेत 16 ढेर
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West Singhbhum Encounter
सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस की संयुक्त कार्रवाई.
1 करोड़ के इनामी नक्सली अनल उर्फ पतिराम मांझी ढेर.
नक्सलमुक्त भारत अभियान को बड़ी मजबूती.
West Singhbhum / झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले से नक्सल विरोधी अभियान की एक बड़ी और निर्णायक खबर सामने आई है। सुरक्षा बलों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए नक्सल नेटवर्क को गहरा झटका दिया है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और झारखंड पुलिस द्वारा चलाए गए इस ऑपरेशन में कुख्यात नक्सली नेता अनल उर्फ पतिराम मांझी समेत कुल 16 नक्सलियों को मुठभेड़ में मार गिराया गया है। यह कार्रवाई लंबे समय से नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे इस इलाके के लिए एक बड़ी राहत मानी जा रही है।
मुठभेड़ में मारा गया अनल उर्फ पतिराम मांझी नक्सली संगठन का सेंट्रल कमेटी मेंबर था और उस पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। वह वर्षों से नक्सली गतिविधियों का संचालन कर रहा था और कई बड़ी हिंसक वारदातों में उसकी भूमिका रही है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए वह एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। उसके मारे जाने को नक्सली संगठन की कमर तोड़ने वाली कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि वह रणनीति, भर्ती और हथियारों की सप्लाई जैसे अहम कामों में शामिल था।
सुरक्षा बलों की इस सफलता पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खुलकर सराहना की है। उन्होंने इस ऑपरेशन को नक्सलमुक्त भारत अभियान की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया। गृह मंत्री ने कहा कि दशकों से देश के कई हिस्सों में भय, हिंसा और अस्थिरता फैलाने वाला नक्सलवाद अब अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है। उन्होंने दोहराया कि सरकार का स्पष्ट लक्ष्य 31 मार्च 2026 से पहले देश से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करना है और इस दिशा में लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
अमित शाह ने यह भी कहा कि सुरक्षा बल कठिन परिस्थितियों में भी साहस, अनुशासन और सटीक रणनीति के साथ अभियान चला रहे हैं। जंगलों और दुर्गम इलाकों में चल रही ये कार्रवाइयां केवल सैन्य सफलता नहीं हैं, बल्कि आम लोगों के जीवन में शांति और विकास की उम्मीद लेकर आने वाली हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अब सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे विकास कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं।
इसके साथ ही गृह मंत्री ने शेष नक्सलियों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि वे हिंसा, आतंक और हथियारों का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार आत्मसमर्पण करने वालों के पुनर्वास, सम्मानजनक जीवन और बेहतर भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उनका कहना था कि बंदूक की राह केवल विनाश की ओर ले जाती है, जबकि विकास और विश्वास का रास्ता नई शुरुआत का अवसर देता है।
पश्चिमी सिंहभूम में हुई यह मुठभेड़ न केवल सुरक्षा बलों की रणनीतिक सफलता है, बल्कि यह संकेत भी देती है कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। आने वाले समय में ऐसे अभियानों से क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास की राह और मजबूत होने की उम्मीद की जा रही है।