बांग्लादेश में चुनावी हिंसा: नरसिंदी में हिंदू युवक की जिंदा जलाकर हत्या, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल

Sun 25-Jan-2026,09:08 PM IST +05:30

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बांग्लादेश में चुनावी हिंसा: नरसिंदी में हिंदू युवक की जिंदा जलाकर हत्या, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल Bangladesh Voilance
  • नरसिंदी में हिंदू युवक चंचल भौमिक की जिंदा जलाकर हत्या.

  • गाजीपुर में हिंदू व्यवसायी की पीट-पीटकर हत्या का मामला.

  • चुनावी माहौल में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता.

Dhaka Division / :

Dhaka / बांग्लादेश में चुनावी माहौल के बीच अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर हो रहे हमलों ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। ताज़ा मामला नरसिंदी से सामने आया है, जहां शुक्रवार रात 23 वर्षीय चंचल भौमिक की उसकी ही दुकान में जिंदा जलाकर हत्या कर दी गई। बताया जा रहा है कि चंचल रात में अपने गैरेज में सो रहा था। हमलावरों ने बाहर से शटर गिराया, पेट्रोल छिड़का और आग लगा दी। भीतर फंसे चंचल की चीखें बाहर खड़े लोगों के दिल को नहीं पिघला सकीं। वे तब तक वहीं खड़े रहे, जब तक उसकी सांसें थम नहीं गईं।

चंचल अपने परिवार का एकमात्र सहारा था। उसके कंधों पर बीमार मां और दिव्यांग भाई की जिम्मेदारी थी। पड़ोसियों के मुताबिक वह शांत स्वभाव का, मेहनती युवक था, जिसने कभी किसी से विवाद नहीं किया। परिवार का आरोप है कि यह कोई सामान्य आपराधिक घटना नहीं, बल्कि धार्मिक विद्वेष से प्रेरित सुनियोजित हत्या है। उनका कहना है कि हिंदू समुदाय को डराने और दबाने के लिए ऐसी घटनाएं लगातार दोहराई जा रही हैं।

यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले दीपु चंद्र दास और खोकोन चंद्र दास जैसे हिंदू युवाओं के साथ भी इसी तरह की बर्बरता की खबरें सामने आ चुकी हैं। इन घटनाओं की कड़ी यह संकेत देती है कि हिंसा महज़ व्यक्तिगत झगड़ों तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि इसके पीछे गहरी वैचारिक नफरत काम कर रही है।

इस नफरत को हवा देने का आरोप कट्टरपंथी संगठनों के नेताओं पर भी लग रहा है। जमात-ए-इस्लामी से जुड़े नेताओं के बयानों ने माहौल को और ज़हरीला किया है। बरगुना-2 सीट से उम्मीदवार अफजल हुसैन के हालिया बयान ने व्यापक आक्रोश पैदा किया। एक चुनावी सभा में उन्होंने कहा कि 80 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले देश की संसद में गैर-मुस्लिमों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। यही नहीं, उन्होंने संविधान को खारिज करते हुए मध्ययुगीन दंड व्यवस्थाओं—जैसे हाथ काटने—को लागू करने की वकालत भी की। ऐसे बयानों को कई लोग अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा को वैध ठहराने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं।

एक हफ्ते पहले गाजीपुर में भी ऐसा ही दिल दहला देने वाला मामला सामने आया था। केले को लेकर हुए विवाद में एक हिंदू व्यवसायी लिटन चंद्र घोष की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। लिटन ‘बैशाखी स्वीटमीट एंड होटल’ का मालिक था। पुलिस के अनुसार, केले के एक गुच्छे को लेकर शुरू हुए विवाद में एक ही परिवार के तीन लोगों—स्वपन मियां (55), उनकी पत्नी माजेदा खातून (45) और बेटे मासूम मियां (28)—ने लिटन पर हमला किया। आरोप है कि घूंसे-लात से गिरने के बाद लिटन की मौके पर ही मौत हो गई।

इन घटनाओं ने बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और चुनावी राजनीति की दिशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मानवाधिकार संगठनों और आम नागरिकों की मांग है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और नफरत फैलाने वाले बयानों पर तत्काल रोक लगे। वरना डर का यह साया और गहराता जाएगा—और उसकी कीमत निर्दोष जानें चुकाती रहेंगी।