तेजस्वी यादव बने राजद के कार्यकारी अध्यक्ष, परिवारवाद पर फिर गरमाई बिहार की सियासत
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Bihar Politics
तेजस्वी यादव बने राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष.
एनडीए और जदयू ने परिवारवाद व हार पर उठाए सवाल.
राजद में नेतृत्व परिवर्तन से बिहार की सियासत गरमाई.
Patna / बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। पटना में आयोजित पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया। इस फैसले के साथ ही राजद में औपचारिक रूप से नेतृत्व की अगली पीढ़ी को बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी गई है। बैठक के बाद पार्टी नेताओं और समर्थकों में उत्साह का माहौल देखने को मिला, वहीं विपक्षी दलों ने इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं।
सत्ता पक्ष से बधाई, विपक्ष से सवाल
तेजस्वी यादव के कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर उन्हें बधाई दी। उन्होंने लिखा कि तेजस्वी यादव को राजद का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त होने पर हार्दिक शुभकामनाएं।
हालांकि, इस नियुक्ति के बाद एनडीए के नेता तेजस्वी यादव पर हमलावर हो गए हैं। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह फैसला आज नहीं तो कल होना ही था, लेकिन पहले यह तय होना चाहिए था कि पार्टी को ऐतिहासिक हार क्यों झेलनी पड़ी। उन्होंने कहा कि हार के कारणों की जिम्मेदारी तय किए बिना किसी को इतने बड़े पद से नवाजना कई सवाल खड़े करता है।
चिराग पासवान का तीखा हमला
चिराग पासवान ने कहा,
“मैं मानता हूं कि वे लालू प्रसाद यादव के पुत्र हैं, इसलिए पार्टी की कमान उन्हीं के हाथों में जाती। लेकिन यह कमान तब ज्यादा स्वाभाविक लगती, जब उनके नेतृत्व में पार्टी का प्रदर्शन बेहतर होता। ऐतिहासिक हार के बाद जिम्मेदारी लेने के बजाय आप इतने बड़े पद पर आसीन हो रहे हैं।”
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि चुनावी हार के बाद तेजस्वी यादव न तो मीडिया के सामने आए, न ही कार्यकर्ताओं से संवाद किया। ऐसे में उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष बनाना यह दर्शाता है कि पार्टी का दायरा सिर्फ परिवार तक सीमित रह गया है।
‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ का दावा
पत्रकारों से बातचीत में चिराग पासवान ने लालू प्रसाद यादव के शासनकाल का जिक्र करते हुए कहा कि 90 के दशक में बिहार से बड़े पैमाने पर पलायन हुआ, जिसे हर बिहारी ने महसूस किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में बिहार में स्थिति पर नियंत्रण पाया जा रहा है और वह “बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट” के विजन के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उनका दावा है कि आने वाले दिनों में बिहार को विकसित राज्य बनाने की दिशा में ठोस काम किया जाएगा।
जदयू का तंज: लोकतंत्र को शर्मसार किया
जदयू ने भी तेजस्वी यादव को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने पर कड़ा तंज कसा। पार्टी की ओर से कहा गया कि “राम मनोहर लोहिया और जननायक कर्पूरी ठाकुर की आत्मा आज कराह रही होगी। आपराधिक मामलों के अभियुक्त को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जा रहा है और सजायाप्त व्यक्ति राष्ट्रीय अध्यक्ष बना हुआ है। यह लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला कदम है।”
परिवार और पार्टी का समर्थन
वहीं, तेजस्वी यादव की बहन और राज्यसभा सांसद मीसा भारती ने इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह पार्टी और बिहार की जनता के लिए खुशी की बात है। अब राजद को एक राष्ट्रीय अध्यक्ष और एक कार्यकारी अध्यक्ष मिल गया है और पार्टी उनके नेतृत्व में मजबूती से आगे बढ़ेगी।
तेजस्वी के बड़े भाई और जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा,
“उन्हें जिम्मेदारी दी गई है, तो उन्हें उसे निभाना चाहिए। जिसे भी जिम्मेदारी मिलती है, उसे अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।”
रोहिणी आचार्य के ट्वीट पर तेजस्वी का बयान
रोहिणी आचार्य के समर्थन वाले ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि अगर लालू प्रसाद यादव ने यह फैसला लिया है, तो उन्हें लगा होगा कि यह सही कदम है। उन्होंने कहा कि पार्टी के लोग आगे बढ़ रहे हैं और यह एक सकारात्मक संकेत है।
आगे की राह
तेजस्वी यादव का कार्यकारी अध्यक्ष बनना राजद के लिए एक अहम मोड़ माना जा रहा है। एक ओर जहां पार्टी इसे भविष्य की तैयारी बता रही है, वहीं विपक्ष इसे परिवारवाद और हार की जिम्मेदारी से बचने की राजनीति करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि तेजस्वी इस नई जिम्मेदारी को किस तरह निभाते हैं और क्या वह राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी को नई दिशा दे पाते हैं या नहीं।