मन की बात के 12 साल पूरे! पीएम मोदी ने बताईं देशभर की प्रेरणादायक कहानियां

Sun 25-Oct-2026,03:20 PM IST +05:30

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मन की बात के 12 साल पूरे! पीएम मोदी ने बताईं देशभर की प्रेरणादायक कहानियां Mann Ki Baat 12 Years
  • पीएम मोदी ने कार्यक्रम की यात्रा और प्रेरक कहानियों को याद किया।

  • जैविक खेती, हथकरघा, स्थानीय उत्पादों और नदी संरक्षण पर जोर दिया।

  • ई-संजीवनी, ब्रेन रिसर्च और भारतीय स्टार्टअप की उपलब्धियों का उल्लेख हुआ।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / बारह साल से देशवासियों के साथ संवाद कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार ‘मन की बात’ में ऐसी कहानियों का जिक्र किया, जो खेती, स्वास्थ्य, विज्ञान और रोजगार की तस्वीर बदल रही हैं। आखिर इन कहानियों में देश के भविष्य के लिए क्या खास संदेश छिपा है?

मन की बात के 12 साल पूरे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ ने अपनी यात्रा के 12 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने देश के अलग-अलग हिस्सों में काम कर रहे उन लोगों और संस्थाओं के प्रयासों का उल्लेख किया, जो समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम देश के सामान्य नागरिकों के परिश्रम, समर्पण, सेवा-भाव और योगदान को सामने लाने का माध्यम रहा है।

प्रधानमंत्री ने श्रोताओं के स्नेह और सुझावों को इस यात्रा की महत्वपूर्ण पूंजी बताया। उनके अनुसार, इस कार्यक्रम के जरिए देश के विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे ऐसे लोगों की कहानियां सामने आई हैं, जिनके प्रयासों पर आमतौर पर अधिक ध्यान नहीं जाता।

जैविक खेती और हथकरघे से महिलाओं को अवसर
कार्यक्रम में पंजाब के मालवा क्षेत्र में चल रही ‘नव-त्रिन्जन’ पहल का उल्लेख किया गया। खेती विरासत मिशन से जुड़ी इस पहल के तहत प्राकृतिक और जैविक कपास की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्राकृतिक रंगों वाली कपास के इस्तेमाल से कपड़ों को रंगने के लिए अलग से रासायनिक रंगों की आवश्यकता कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

इस पहल के अंतर्गत बुनकरी का प्रशिक्षण देने के लिए एक स्कूल भी शुरू किया गया है। प्रधानमंत्री ने रमनदीप कौर, रेखा रानी, सुनेहा देवी और रजनी कौर जैसी महिलाओं के उदाहरण दिए, जिनके जीवन में प्रशिक्षण के बाद बदलाव आया है। इनमें से कई महिलाएं पहले मजदूरी या घरेलू काम पर निर्भर थीं, जबकि अब वे हथकरघे पर कपड़े और अन्य उत्पाद तैयार कर रही हैं।

नदी संरक्षण और स्वदेशी उत्पादों पर जोर
प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में हेवल नदी को बचाने के लिए स्थानीय लोगों और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों की चर्चा की। नदी में पानी कम होने और प्राकृतिक जलस्रोतों के सूखने की समस्या के बाद वर्षा जल रोकने, जमीन में पानी पहुंचाने और पौधे लगाने जैसे कदम उठाए गए। इन प्रयासों से नदी और आसपास के कई प्राकृतिक जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने में मदद मिली।

कार्यक्रम में ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान पर भी जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने बिहार के पूर्णिया के मखाने और कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल के दूसरे देशों तक पहुंचने का उल्लेख किया। महाराष्ट्र के आदिवासी समुदायों के उत्पादों की पैकेजिंग और ‘शबरी नेचुरल्स’ के उत्पादों को भी चर्चा में शामिल किया गया। इसके अलावा, गांधी जयंती पर खादी ग्रामोद्योग के उत्पादों की एक दिन की बिक्री 28 करोड़ रुपये से अधिक रहने की जानकारी दी गई।

डिजिटल स्वास्थ्य सेवा से करोड़ों परामर्श
स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीक के उपयोग का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि ई-संजीवनी योजना के माध्यम से लगभग 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशन किए जा चुके हैं। इस सेवा से दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह लेने में मदद मिली है।

कार्यक्रम में अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप, लद्दाख और नागालैंड के उदाहरण दिए गए, जहां स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों ने ई-संजीवनी के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सकों से संपर्क कर मरीजों की सहायता की। प्रधानमंत्री ने देशभर में लगभग 1.90 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की भूमिका का भी उल्लेख किया।

ब्रेन रिसर्च, स्टार्टअप और अंगदान
प्रधानमंत्री ने आईआईटी मद्रास में स्थापित सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर का जिक्र करते हुए मानव मस्तिष्क की उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल 3डी मैपिंग के प्रयासों की जानकारी दी। इस परियोजना का लक्ष्य 100 मानव मस्तिष्कों की 3डी मैपिंग करके उनका अध्ययन करना है। उन्होंने अंगदान के महत्व को भी रेखांकित किया और मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम की शिवानी के परिवार के निर्णय का उल्लेख किया।

इसके अलावा, कार्यक्रम में सोने की गुणवत्ता जांचने, बैंक धोखाधड़ी से निकाली गई रकम की वसूली, सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल और तेज चार्ज होने वाली बैटरियों पर काम कर रहे स्टार्टअप का जिक्र हुआ।

श्रीअन्न, महर्षि वाल्मीकि और राष्ट्रीय एकता
प्रधानमंत्री ने मेघालय और नागालैंड में श्रीअन्न यानी मिलेट्स की खेती को दोबारा बढ़ावा देने वाले प्रयासों की चर्चा की। उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर मिलेट्स से कुकीज, केक, मफिन और अन्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जिससे इनकी मांग बढ़ाने और किसानों को प्रोत्साहित करने में मदद मिल रही है।

कार्यक्रम में महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाओं, भाई परमानंद के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान और सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर आयोजित होने वाली ‘रन फॉर यूनिटी’ का भी उल्लेख किया गया।

स्थानीय प्रयासों से बदलाव का संदेश
‘मन की बात’ के इस संस्करण में खेती, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य, विज्ञान, महिला सशक्तीकरण और स्वदेशी उत्पादों जैसे विषय प्रमुख रहे। प्रधानमंत्री का संदेश स्थानीय प्रतिभाओं, पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक को साथ लेकर आगे बढ़ने पर केंद्रित रहा। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने देशवासियों को दिवाली और छठ सहित आगामी त्योहारों की शुभकामनाएं दीं और समाज के सकारात्मक प्रयासों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।