Donald Trump Threat to Iran: हत्या की कोशिश पर बड़े हमले की चेतावनी

Sat 11-Jul-2026,11:32 PM IST +05:30

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Donald Trump Threat to Iran: हत्या की कोशिश पर बड़े हमले की चेतावनी Trump Warning
  • ट्रंप ने ईरान को हत्या की कोशिश पर कड़े जवाब की चेतावनी दी।

  • 1000 मिसाइलें तैयार होने और बड़े सैन्य हमले का दावा किया।

  • बयान के बाद अमेरिका-ईरान तनाव पर वैश्विक चर्चा तेज हुई।

Tehran Province / Tehran :

Tehran / अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने तीखे और विवादास्पद बयान से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने दावा किया है कि यदि ईरान उनकी हत्या करने की कोशिश करता है या इसमें सफल होता है, तो अमेरिका ऐसा जवाबी हमला करेगा जिसकी मिसाल दुनिया ने पहले कभी नहीं देखी होगी। ट्रंप ने यहां तक कहा कि उन्होंने पहले से ऐसे आदेश जारी कर रखे हैं, जिनके तहत ईरान पर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की जा सकती है।

न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए एक इंटरव्यू और बाद में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर किए गए पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि “1000 मिसाइलें पहले से ईरान की ओर निशाना साधे तैयार हैं।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनके खिलाफ कोई हमला होता है तो अमेरिका हजारों और मिसाइलों के साथ जवाब देगा। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सेना को पहले से निर्देश दिए जा चुके हैं और आवश्यकता पड़ने पर एक वर्ष तक लगातार सैन्य अभियान चलाया जा सकता है।

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। हाल के वर्षों में ईरान ने कई बार 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए जनरल कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेने की बात कही है। ट्रंप का मानना है कि वह ईरान की कथित “हिट लिस्ट” में सबसे ऊपर हैं। उन्होंने नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान भी कहा था कि ईरान उन्हें अपना प्रमुख निशाना मानता है।

हालांकि ट्रंप के दावे ने एक महत्वपूर्ण संवैधानिक बहस को जन्म दिया है। सवाल यह है कि क्या कोई अमेरिकी राष्ट्रपति अपनी मृत्यु के बाद भी लागू होने वाला ऐसा सैन्य आदेश दे सकता है? विशेषज्ञों के अनुसार इसका जवाब “नहीं” है। अमेरिकी संविधान के तहत सेना का नियंत्रण उस समय के राष्ट्रपति के हाथ में होता है, जो देश का कमांडर-इन-चीफ होता है। किसी भी बड़े सैन्य अभियान, युद्ध या हमले का अंतिम निर्णय तत्कालीन राष्ट्रपति और राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र ही ले सकते हैं। इसलिए कोई भी राष्ट्रपति ऐसा स्थायी आदेश नहीं छोड़ सकता जो उसकी मृत्यु के बाद स्वतः लागू हो जाए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान केवल ईरान को चेतावनी देने तक सीमित नहीं है। यह अमेरिकी जनता और अपने समर्थकों के लिए भी एक राजनीतिक संदेश है। वह स्वयं को एक मजबूत और निडर नेता के रूप में प्रस्तुत करना चाहते हैं, जो किसी भी खतरे के सामने झुकने को तैयार नहीं है।

इतिहास में भी ऐसे उदाहरण मिलते हैं जब नेताओं ने अपनी अनुपस्थिति या मृत्यु की स्थिति में कठोर जवाबी कार्रवाई की योजनाएं बनाई थीं। शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ का “डेड हैंड” सिस्टम इसी सोच का उदाहरण माना जाता है, जिसे परमाणु हमले की स्थिति में स्वतः जवाबी कार्रवाई के लिए विकसित किया गया था। वहीं द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम दिनों में एडोल्फ हिटलर ने “नीरो डिक्री” जारी कर देश के महत्वपूर्ण ढांचे को नष्ट करने का आदेश दिया था।

फिलहाल ट्रंप का बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि कानूनी और संवैधानिक दृष्टि से उनकी बातों को अधिक राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, न कि किसी वास्तविक और स्वतः लागू होने वाले सैन्य आदेश के रूप में।