रुपाली चाकणकर का इस्तीफा: अशोक खरात कांड ने महाराष्ट्र की राजनीति में मचाया तूफान
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Rupali Chakankar Resignation
रुपाली चाकणकर ने महिला आयोग अध्यक्ष पद से दिया इस्तीफा.
अशोक खरात पर यौन शोषण और धोखाधड़ी के आरोप.
विपक्ष ने एसआईटी जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की.
Mumbai / महाराष्ट्र की राजनीति और सामाजिक दायरे में उस समय हलचल तेज हो गई, जब एनसीपी (अजीत पवार गुट) की नेता और महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रुपाली चाकणकर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनका यह कदम ऐसे वक्त में सामने आया है, जब नासिक के कथित फर्जी बाबा अशोक खरात से जुड़ा विवाद लगातार तूल पकड़ रहा है और इसमें उनके नाम की भी चर्चा हो रही थी।
दरअसल, अशोक खरात, जिसे ‘कैप्टन’ खरात के नाम से भी जाना जाता है, पर गंभीर आरोप लगे हैं। उस पर एक महिला के साथ तीन साल तक लगातार यौन उत्पीड़न करने का मामला दर्ज हुआ है, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर 24 मार्च तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। जांच के दौरान उसके कई नेताओं के साथ संबंधों की तस्वीरें सामने आईं, वहीं कुछ आपत्तिजनक वीडियो भी मिलने की बात कही जा रही है।
इन खुलासों के बाद राजनीतिक गलियारों में रुपाली चाकणकर के इस्तीफे की मांग तेज हो गई थी। हालांकि उन्होंने अपने इस्तीफे में किसी विवाद का जिक्र नहीं किया और इसे “व्यक्तिगत कारणों” से लिया गया फैसला बताया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भेजे गए पत्र में उन्होंने लिखा कि 15 अक्टूबर 2024 को उन्हें महिला आयोग की अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, लेकिन अब वे स्वेच्छा से इस पद से इस्तीफा दे रही हैं। उन्होंने सरकार और सहयोगियों का आभार भी जताया।
लेकिन विपक्ष इस पूरे मामले को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता अतुल लोन्धे ने इस मामले की एसआईटी जांच की मांग की है और कहा है कि इसकी निगरानी किसी वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी को करनी चाहिए। वहीं शिवसेना (उद्धव गुट) की प्रवक्ता सुषमा अंधारे ने और भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि चाकणकर ने खरात के प्रभाव में आकर खुद को नुकसान पहुंचाया था और मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए उनका नार्को टेस्ट कराए जाने की मांग की।
सामाजिक कार्यकर्ता अंजली दमानिया ने भी इस मामले को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि खरात ने खासतौर पर आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को निशाना बनाया और उनके शोषण के साथ-साथ धनवान भक्तों से पैसे भी ऐंठे। यह मामला अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं रह गया है, बल्कि इसमें सामाजिक, राजनीतिक और नैतिक पहलू भी जुड़ गए हैं।
एनसीपी के वरिष्ठ नेता प्रफुल पटेल ने भी साफ किया है कि इस मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं शिवसेना यूबीटी के नेता आनंद दुबे ने खरात की तुलना कुख्यात अमेरिकी अपराधी जेफरी एपस्टीन से करते हुए इसे बेहद गंभीर मामला बताया है।
फिलहाल यह मामला तेजी से जांच के दायरे में है और आने वाले दिनों में कई और खुलासे हो सकते हैं। रुपाली चाकणकर का इस्तीफा इस पूरे विवाद का एक अहम मोड़ जरूर बन गया है, लेकिन असली सवाल अभी भी कायम है—क्या इस मामले में पूरी सच्चाई सामने आ पाएगी?