उपराष्ट्रपति से मिले जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, जल संरक्षण और नदी जोड़ परियोजनाओं की प्रगति पर हुई चर्चा
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Water Conservation
उपराष्ट्रपति को जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण अभियानों की जानकारी दी गई।
केन-बेतवा, पार्वती-कालीसिंध-चंबल और गोदावरी-कावेरी लिंक परियोजनाओं पर चर्चा हुई।
सितंबर 2026 में होने वाले भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह का निमंत्रण दिया गया।
Delhi / केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, जल शक्ति राज्य मंत्री डॉ. राज भूषण चौधरी और जल शक्ति मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंगलवार को उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन से उपराष्ट्रपति भवन में मुलाकात की। इस दौरान देश में जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और नदी जोड़ परियोजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने उपराष्ट्रपति को जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं की जानकारी दी।
बैठक में विशेष रूप से "जल संचय जन भागीदारी" (JSJB) अभियान पर चर्चा हुई। उपराष्ट्रपति ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि जल संरक्षण आज देश की सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में से एक है। उन्हें बताया गया कि इस अभियान के तहत सरकार, स्थानीय समुदायों, उद्योगों और सामाजिक संगठनों को एक साथ जोड़कर जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, जेएसजेबी 2.0 के अंतर्गत अब तक 1.55 करोड़ से अधिक जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण संरचनाएं बनाई जा चुकी हैं, जो निर्धारित लक्ष्य से काफी अधिक हैं।
बैठक के दौरान केन-बेतवा लिंक परियोजना, पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना और गोदावरी-कावेरी लिंक परियोजना जैसी महत्वाकांक्षी नदी जोड़ योजनाओं की प्रगति की भी जानकारी दी गई। उपराष्ट्रपति ने कहा कि नदियों को आपस में जोड़ने की अवधारणा देश के जल संकट को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे सूखा प्रभावित क्षेत्रों को राहत मिलेगी, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा और विभिन्न क्षेत्रों में संतुलित विकास को बढ़ावा मिलेगा।
सी.पी. राधाकृष्णन ने सुझाव दिया कि केन-बेतवा जैसी बड़ी राष्ट्रीय परियोजनाओं का व्यापक दस्तावेजीकरण किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन ऐतिहासिक परियोजनाओं पर वृत्तचित्र, शोध सामग्री और अभिलेख तैयार किए जाने चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियां राष्ट्र निर्माण के इन महत्वपूर्ण प्रयासों को समझ सकें और उन पर गर्व कर सकें।
उपराष्ट्रपति ने नदी जोड़ परियोजनाओं के समर्थन में अपनी पुरानी पदयात्रा को याद करते हुए कहा कि इन योजनाओं को लागू करने में वित्तीय संसाधन सबसे बड़ी चुनौती नहीं हैं। उनके अनुसार कई बार राजनीतिक मतभेद और सोच में अंतर परियोजनाओं की गति को प्रभावित करते हैं। उन्होंने जल प्रबंधन के क्षेत्र में दीर्घकालिक और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
बैठक के अंत में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और राज्य मंत्री डॉ. राज भूषण चौधरी ने उपराष्ट्रपति को सितंबर 2026 में आयोजित होने वाले भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह (India International Water Week) में शामिल होने का आमंत्रण भी दिया। यह आयोजन जल संरक्षण और जल प्रबंधन से जुड़े वैश्विक मुद्दों पर चर्चा का महत्वपूर्ण मंच माना जाता है।