अहमदाबाद में खाद्य प्रसंस्करण पर वैश्विक मंथन, चिराग पासवान बोले- रोजगार और किसानों की आय बढ़ाने की अपार क्षमता
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Food Processing Industry
अहमदाबाद में खाद्य प्रसंस्करण पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय नीति संवाद आयोजित।
चिराग पासवान ने रोजगार, मूल्यवर्धन और किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया।
खाद्य प्रसंस्करण स्तर 2016 के 10% से बढ़कर 2023 में 17% पहुंचा।
Ahmedabad / भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (एमओएफपीआई) और विश्व बैंक समूह की सैपलिंग पहल के सहयोग से 9 जून 2026 को अहमदाबाद में एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय उच्च-स्तरीय नीति संवाद का आयोजन किया गया। "अन्लॉकिंग वैल्यू: दक्षिण एशिया में रोजगार सृजन और सतत विकास के लिए खाद्य प्रसंस्करण को आगे बढ़ाना" विषय पर आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम में दक्षिण एशिया के विभिन्न देशों से लगभग 200 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इस संवाद में नीति निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, शोधकर्ता, स्टार्टअप, विकास साझेदार और कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ एक मंच पर एकत्र हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को मजबूत बनाना, कृषि मूल्य श्रृंखलाओं को बेहतर करना और दक्षिण एशिया में टिकाऊ एवं समावेशी खाद्य प्रणालियों का निर्माण करना था।
कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने किया। उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण कृषि और समृद्धि के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी है। यह क्षेत्र किसानों की आय बढ़ाने, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने, रोजगार सृजन और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने भारत को वैश्विक खाद्य प्रसंस्करण केंद्र बनाने की दिशा में सरकार के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला।
गुजरात सरकार के कृषि मंत्री जीतूभाई वाघानी ने खाद्य प्रसंस्करण को कृषि परिवर्तन का प्रमुख इंजन बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र रोजगार, निवेश और आर्थिक विकास को गति देने की क्षमता रखता है। उन्होंने गुजरात में राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और प्रबंधन संस्थान के नए परिसर की स्थापना का समर्थन भी किया।
कार्यक्रम में विश्व बैंक के कार्यवाहक कंट्री डायरेक्टर पॉल प्रोसी, गेट्स फाउंडेशन की भारत निदेशक अर्चना व्यास और मत्स्य पालन मंत्रालय के सचिव अविनाश जोशी सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। चर्चा के दौरान कृषि आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने, छोटे खाद्य प्रसंस्करणकर्ताओं को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने, नई तकनीकों को अपनाने, गुणवत्ता मानकों में सुधार और निवेश आकर्षित करने जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
संवाद के दौरान एक नवाचार मेले का भी आयोजन किया गया, जिसमें कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स, डिजिटल ट्रेसिबिलिटी, स्मार्ट प्रोसेसिंग तकनीक, टिकाऊ पैकेजिंग और आधुनिक भंडारण प्रणालियों से जुड़े नवीन समाधान प्रदर्शित किए गए। इसका उद्देश्य उद्योग, नीति निर्माताओं और नवप्रवर्तकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना था।
इस अवसर पर खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय ने "भारत में खाद्य प्रसंस्करण के स्तर का आकलन" नामक एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट भी जारी की। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में खाद्य प्रसंस्करण का स्तर वर्ष 2016 के लगभग 10 प्रतिशत से बढ़कर 2023 में 17 प्रतिशत तक पहुंच गया है। अध्ययन में फलों, सब्जियों और डेयरी उत्पादों में मूल्यवर्धन की बड़ी संभावनाओं को रेखांकित किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के क्षेत्रीय संवाद दक्षिण एशिया में ज्ञान साझा करने, निवेश बढ़ाने, एमएसएमई को सशक्त बनाने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। साथ ही, ये पहल भारत और दक्षिण एशिया को वैश्विक खाद्य मूल्य श्रृंखला में मजबूत स्थान दिलाने में भी मददगार साबित होंगी।