छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का मनरेगा बचाओ संग्राम
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पंचायत, ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर चरणबद्ध कार्यक्रमों से कांग्रेस मनरेगा श्रमिकों को सीधे जोड़ेगी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस, धरना, विधानसभा घेराव और क्षेत्रीय रैलियों से आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर धार दी जाएगी।
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार के नए VB-GRAM-G कानून के विरोध में राष्ट्रव्यापी आंदोलन “मनरेगा बचाओ संग्राम” की तैयारियां तेज कर दी हैं। यह जन आंदोलन 10 जनवरी से 25 फरवरी 2026 तक लगभग 45 दिनों तक चलेगा, जिसमें ग्रामीण मजदूरों, किसानों और पंचायत प्रतिनिधियों को जोड़ा जाएगा।
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, इस आंदोलन का उद्देश्य मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना को कमजोर करने वाले नए कानून के खिलाफ जनजागरण और दबाव बनाना है। पार्टी का आरोप है कि VB-GRAM-G कानून से ग्रामीण रोजगार, मजदूरी भुगतान और पंचायतों के अधिकारों पर सीधा असर पड़ेगा।
पंचायत स्तर से अभियान की शुरुआत
कांग्रेस 10 जनवरी को सभी जिलों में एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आंदोलन की औपचारिक शुरुआत करेगी। 11 जनवरी को जिला मुख्यालयों में एक दिवसीय उपवास और प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन होंगे।
इसके बाद 12 से 29 जनवरी तक पंचायत स्तर पर चौपाल और जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान मनरेगा श्रमिकों को कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के पत्र सौंपे जाएंगे, जिसमें कानून के दुष्प्रभावों की जानकारी दी जाएगी।
ब्लॉक और जिला स्तर पर धरना
30 जनवरी को वार्ड और ब्लॉक स्तर पर शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन होंगे। 31 जनवरी से 6 फरवरी तक प्रदेशभर के कलेक्टर कार्यालयों के सामने “मनरेगा बचाओ धरना” आयोजित किया जाएगा।
विधानसभा घेराव और रैलियां
7 से 15 फरवरी तक पीसीसी के नेतृत्व में विधानसभा घेराव कार्यक्रम प्रस्तावित है। वहीं आंदोलन का समापन 16 से 25 फरवरी के बीच एआईसीसी के नेतृत्व में आयोजित क्षेत्रीय रैलियों से किया जाएगा।
कांग्रेस नेताओं का दावा है कि यह आंदोलन ग्रामीण भारत की आवाज बनेगा और सरकार को मनरेगा से जुड़े फैसलों पर पुनर्विचार के लिए मजबूर करेगा।