Jantar-Mantar Protest | जंतर-मंतर पर प्रदर्शन बंद! दिल्ली पुलिस के फैसले को सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में चुनौती
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
Delhi Protest Showdown: Courts Challenge Police Ban
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले को अदालत में चुनौती दी गई।
आईवाईसी अध्यक्ष उदय भानु चिब ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान को वैकल्पिक प्रदर्शन स्थल बताया गया है।
New Delhi / दिल्ली का जंतर-मंतर, जहां सालों से लोग अपनी आवाज बुलंद करते आए हैं, अब प्रदर्शन स्थल नहीं रहेगा! दिल्ली पुलिस के इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई है। क्या प्रदर्शनकारियों को फिर जंतर-मंतर पर विरोध करने की अनुमति मिलेगी?
दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन को लेकर एक बड़ा कानूनी मामला सामने आया है। दिल्ली पुलिस के जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस फैसले से लोगों के शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने और अपनी बात रखने के मौलिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
दरअसल, दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार की ओर से 11 अक्टूबर को जारी स्थायी आदेश के मुताबिक, जंतर-मंतर अब विरोध-प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थल नहीं रहेगा। इसके स्थान पर तीन वैकल्पिक जगहों—रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान—को प्रदर्शन के लिए प्रस्तावित किया गया है।
पुलिस के आदेश में यह भी कहा गया है कि इन तीनों स्थानों पर होने वाले प्रदर्शनों के लिए विस्तृत और संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी अलग से जारी की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट में क्या दलील दी गई?
सुप्रीम कोर्ट में एक वकील की ओर से दायर याचिका में जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले पर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में कहा गया है कि शांतिपूर्ण तरीके से सभा करना और अपनी मांगों को सार्वजनिक रूप से रखना नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हिस्सा है।
याचिकाकर्ता ने यह भी दलील दी है कि शीर्ष अदालत पहले जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल के रूप में मंजूरी दे चुकी है। याचिका में रामलीला मैदान को विकल्प बनाए जाने की उपयुक्तता पर भी सवाल उठाए गए हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट में भी चुनौती
इस मामले में इंडियन यूथ कांग्रेस यानी आईवाईसी के अध्यक्ष उदय भानु चिब ने भी दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। उन्होंने याचिका दायर कर दिल्ली पुलिस के आदेश पर रोक लगाने की मांग की है।
याचिकाओं में प्रस्तावित वैकल्पिक स्थलों को लेकर भी चिंता जताई गई है। आरोप है कि इनमें से कुछ स्थान लैंडफिल यानी बड़े कूड़ास्थलों के आसपास हैं, जिससे वहां सार्वजनिक सभाएं आयोजित करने की उपयुक्तता पर सवाल खड़े होते हैं।
याचिकाकर्ताओं की कानूनी टीम का नेतृत्व दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश मुक्ता गुप्ता कर सकती हैं।
फिलहाल, इस मामले में अदालतों का अंतिम फैसला सामने आना बाकी है। अब देखना होगा कि न्यायालय दिल्ली पुलिस के आदेश पर क्या रुख अपनाते हैं और राजधानी में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों के लिए जंतर-मंतर की भूमिका को लेकर क्या दिशा तय होती है।