विकसित भारत@2047 के लिए प्रशासनिक सुधार जरूरी, उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने IIPA को दिया बड़ा संदेश

Sat 31-Oct-2026,10:40 PM IST +05:30

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विकसित भारत@2047 के लिए प्रशासनिक सुधार जरूरी, उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने IIPA को दिया बड़ा संदेश IIPA Annual General Meeting
  • उपराष्ट्रपति ने आईआईपीए की 72वीं वार्षिक आम सभा को संबोधित किया।

  • सुशासन, प्रशासनिक सुधार और नागरिक-केंद्रित व्यवस्था पर दिया जोर।

  • विकसित भारत@2047 के लिए सिविल सेवाओं को भविष्य के अनुरूप तैयार करने की अपील।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / क्या केवल आर्थिक विकास से देश में सुशासन स्थापित हो सकता है? क्या सरकारी योजनाओं की सफलता का पैमाना सिर्फ आंकड़े होने चाहिए, या आम नागरिक की खुशी और जीवन स्तर भी इसमें शामिल होना चाहिए? भारत के प्रशासनिक भविष्य को लेकर उपराष्ट्रपति ने महत्वपूर्ण संदेश दिया है।

भारत के उपराष्ट्रपति और भारतीय लोक प्रशासन संस्थान यानी आईआईपीए के अध्यक्ष सी. पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली में संस्थान की आम सभा की 72वीं वार्षिक बैठक को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने देश की प्रशासनिक व्यवस्था, सुशासन, तकनीक आधारित शासन और विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को लेकर महत्वपूर्ण विचार रखे।

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री और आईआईपीए की कार्यकारी परिषद के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र सिंह, संस्थान के महानिदेशक डॉ. सुरेंद्र कुमार बागड़े, कार्यकारी परिषद और सामान्य निकाय के सदस्य, संकाय सदस्य तथा क्षेत्रीय और स्थानीय शाखाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय एकता दिवस और सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने देश के लौह पुरुष को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि सरदार पटेल भारत के राजनीतिक एकीकरण के वास्तुकार थे। उन्होंने सैकड़ों रियासतों को एकजुट कर एक राष्ट्र के निर्माण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।

उपराष्ट्रपति ने वर्ष 2026 के दौरान आईआईपीए में किए गए संस्थागत सुधारों की भी सराहना की। इनमें 52वें उन्नत व्यावसायिक कार्यक्रम का पुनर्गठन, संरचित इंटर्नशिप कार्यक्रम और केंद्रीय सिविल सेवा तथा केंद्रीय सिविल लेखा सेवा के अधिकारियों की भागीदारी शामिल है। उनके अनुसार, इन पहलों से संस्थान के प्रशासनिक और वित्तीय ढांचे को मजबूती मिली है। उन्होंने डॉ. जितेंद्र सिंह के मार्गदर्शन के साथ महानिदेशक, शिक्षकों और कर्मचारियों के योगदान की भी प्रशंसा की।

बदलते समय में लोक प्रशासन की भूमिका पर चर्चा करते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि आज शासन व्यवस्था से अधिक तेज, नागरिक-केंद्रित, तकनीक-सक्षम, आंकड़ों पर आधारित और परिणामोन्मुख होने की अपेक्षा की जा रही है। उन्होंने जोर दिया कि सुशासन का मूल्यांकन केवल आर्थिक विकास से नहीं किया जा सकता। इसके साथ यह भी देखना जरूरी है कि सरकारी नीतियों का लोगों की खुशी, जीवन स्तर और समग्र कल्याण पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।

गरीबी उन्मूलन के संदर्भ में उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से ऊपर लाया गया है। उन्होंने इसे समावेशी विकास और बेहतर जीवन स्तर की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उनके अनुसार, आर्थिक प्रगति का वास्तविक उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को सम्मान, सुरक्षा और बेहतर अवसर उपलब्ध कराना होना चाहिए।

उन्होंने प्रभावी प्रशासन के लिए केंद्र, राज्य और जिला स्तर के अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय को भी आवश्यक बताया। साथ ही पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाने तथा प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर दिया।

उपराष्ट्रपति ने आईआईपीए से विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सिविल सेवाओं की बदलती भूमिका पर विशेष काम करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारत की प्रशासनिक व्यवस्था ऐसे समय में विकसित हुई थी, जब देश मुख्य रूप से ग्रामीण और कृषि आधारित था। लेकिन अब सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। इसलिए प्रशासनिक प्रणालियों को भी नई जरूरतों के अनुरूप तैयार करना होगा।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने आईआईपीए से उत्तरदायी, समावेशी, नैतिक और भविष्य के लिए तैयार शासन व्यवस्था बनाने में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने की अपील की।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने लोक प्रशासन और संस्थान के क्षेत्र में योगदान को सम्मानित करते हुए पॉल एच. एप्पलबी पुरस्कार, शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए डॉ. राजेंद्र प्रसाद पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ आईआईपीए शाखा पुरस्कार भी प्रदान किए।

कुल मिलाकर, 72वीं वार्षिक आम सभा की बैठक में उपराष्ट्रपति का संदेश स्पष्ट रहा कि विकसित भारत का निर्माण केवल आर्थिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि मजबूत प्रशासन, बेहतर समन्वय, तकनीकी नवाचार और नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव से संभव होगा।