उज्ज्वला योजना पर खरगे का मोदी सरकार पर हमला, सब्सिडी वाले LPG सिलेंडर 9 से घटाकर 4 किए जाने पर उठाए सवाल
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Ujjwala Yojana
उज्ज्वला योजना में सब्सिडी वाले सिलेंडरों की सीमा 9 से घटाकर 4 की गई।
मल्लिकार्जुन खरगे ने फैसले को गरीब विरोधी बताते हुए सरकार पर निशाना साधा।
सरकार ने बदलाव को औसत घरेलू गैस खपत के आधार पर उचित ठहराया।
Delhi / कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की वार्षिक सीमा नौ से घटाकर चार किए जाने के फैसले को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गरीबों के हितों की अनदेखी कर रही है और इससे लाखों परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
खरगे ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने पहले मनरेगा के तहत गरीबों से रोजगार का अधिकार छीना और अब रसोई से जुड़ी मूलभूत सुविधा पर भी चोट कर रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में जब प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना शुरू की गई थी, तब महिलाओं को धुएं से मुक्ति दिलाने और साल में 12 सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने का वादा किया गया था। लेकिन समय के साथ इस संख्या में लगातार कटौती की गई है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पहले सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या 12 से घटाकर 9 की गई और अब इसे केवल 4 तक सीमित कर दिया गया है। उनके अनुसार यह कदम गरीब परिवारों के लिए गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “12 का वादा, लेकिन 4 का इरादा”, जो सरकार की कथनी और करनी के बीच के अंतर को दर्शाता है।
खरगे ने दावा किया कि देश में लगभग 5.56 करोड़ उज्ज्वला लाभार्थी ऐसे हैं जो आर्थिक तंगी के कारण नियमित रूप से गैस सिलेंडर नहीं खरीद पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गैस की बढ़ती कीमतों और सब्सिडी में कटौती के कारण कई महिलाएं फिर से लकड़ी और पारंपरिक चूल्हों का उपयोग करने को मजबूर हो रही हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
वहीं, सरकार का पक्ष रखते हुए एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को कहा था कि सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या में यह बदलाव औसत घरेलू खपत के आंकड़ों को ध्यान में रखकर किया गया है। अधिकारी के अनुसार अधिकांश लाभार्थी सालभर में सीमित संख्या में ही सिलेंडर उपयोग करते हैं, इसलिए नई व्यवस्था बनाई गई है।
उज्ज्वला योजना में हुए इस बदलाव को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष इसे गरीब विरोधी कदम बता रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि यह निर्णय वास्तविक खपत और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को ध्यान में रखकर लिया गया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बना रह सकता है।