Lucknow Agnikand: 2016 में ही इमारत गिराने का आदेश, अब SIT जांच शुरू
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Lucknow Fire
2016 में इमारत गिराने का आदेश जारी होने का खुलासा।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर एसआईटी ने जांच तेज की।
सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर कई संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई।
Kucknow / लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड के बाद जांच में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। इस हादसे में 15 लोगों की मौत के बाद पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तरीय बैठक की और जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) के गठन का निर्देश दिया है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस तीन मंजिला इमारत में आग लगी, उसका मूल नक्शा वर्ष 2014 में केवल आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था। इसके बावजूद वहां व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने वर्ष 2016 में अवैध निर्माण को लेकर भवन मालिकों के खिलाफ मामला दर्ज किया था और इमारत को ध्वस्त करने का आदेश भी जारी किया गया था। हालांकि बाद में अदालत में आपत्ति दाखिल होने के बाद यह आदेश निरस्त कर दिया गया।
हादसे के बाद पुलिस ने अब तक छह एफआईआर दर्ज की हैं और बिल्डिंग मालिक समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं चार अधिकारियों को भी निलंबित किया जा चुका है। प्रशासन का मानना है कि भवन निर्माण और अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी इस हादसे का बड़ा कारण हो सकती है।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इमारत बिना वैध फायर एनओसी के संचालित हो रही थी। यही वजह है कि इस घटना की तुलना दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड से की जा रही है, जहां सुरक्षा नियमों की अनदेखी के कारण बड़ा हादसा हुआ था।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित एसआईटी ने घटनास्थल का निरीक्षण शुरू कर दिया है। टीम आग लगने के कारणों, सुरक्षा मानकों में हुई चूक और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी की जांच कर रही है। सभी संबंधित विभागों से विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी गई है।
इस बीच लखनऊ हादसे का असर अन्य शहरों में भी दिखाई देने लगा है। कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) ने शहर के प्रमुख कोचिंग हब काकादेव में विशेष अभियान चलाकर फिजिक्स वाला समेत 22 कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया है। जांच में इन संस्थानों में भवन और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई थी।
प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले संस्थानों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। लखनऊ अग्निकांड ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर अवैध निर्माण और सुरक्षा नियमों की अनदेखी कब तक लोगों की जान लेती रहेगी।