नई दिल्ली में पोंगल समारोह को पीएम मोदी ने किया संबोधित, एकता पर जोर
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित पोंगल समारोह में भारतीय संस्कृति और कृषि परंपराओं के महत्व को रेखांकित किया।
पोंगल को मेहनतकश किसानों और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का पर्व बताते हुए पीएम ने सांस्कृतिक एकता पर बल दिया।
कार्यक्रम में तमिल संस्कृति, परंपरागत व्यंजन और लोक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की विविधता दिखाई
Delhi / प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित पोंगल समारोह को संबोधित करते हुए देशवासियों को इस पारंपरिक पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि पोंगल केवल एक क्षेत्रीय त्योहार नहीं, बल्कि भारत की कृषि परंपरा, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक है। राजधानी में आयोजित इस समारोह में विभिन्न राज्यों के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और हमारे त्योहार खेतों, फसलों और किसानों से गहराई से जुड़े हैं। पोंगल जैसे पर्व किसानों की मेहनत को सम्मान देने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि जब नई फसल घर आती है, तब उत्सव मनाना हमारी परंपरा रही है, जो हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलना सिखाती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने तमिल संस्कृति की सराहना करते हुए कहा कि तमिल भाषा, साहित्य और परंपराएं भारत की सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध बनाती हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पोंगल का संदेश केवल समृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता को भी मजबूत करता है।
कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक वेशभूषा, लोक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को उत्सवमय बना दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब देश के अलग-अलग हिस्सों के त्योहार राजधानी में मनाए जाते हैं, तो इससे “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” की भावना को मजबूती मिलती है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपनी जड़ों और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े रहें। अपने भाषण के अंत में प्रधानमंत्री ने देशवासियों के सुख, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। उन्होंने कहा कि ऐसे पर्व हमें आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुट होने की प्रेरणा देते हैं और यही भारत की असली ताकत है।