झारखंड के सारंडा जंगल में नक्सलियों से भीषण मुठभेड़, इनामी नक्सली ढेर – सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई

Thu 22-Jan-2026,02:28 PM IST +05:30

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झारखंड के सारंडा जंगल में नक्सलियों से भीषण मुठभेड़, इनामी नक्सली ढेर – सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई Saranda Encounter
  • सारंडा जंगल में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़.

  • एक इनामी नक्सली सहित कई के मारे जाने की सूचना.

  • नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत बड़ा ऑपरेशन.

Jharkhand / Pashchim Singhbhum :

Saranda / झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले से एक बार फिर नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी खबर सामने आई है। नक्सल प्रभावित सारंडा जंगल में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ ने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है। यह मुठभेड़ किरीबुरू और छोटानागरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत कुमडी इलाके में हुई, जहां सुरक्षाबलों को खुफिया सूचना के आधार पर नक्सलियों की मौजूदगी की जानकारी मिली थी। सूचना मिलते ही सुरक्षाबलों ने इस दुर्गम और घने जंगल वाले इलाके में घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया।

सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों की ओर से अचानक फायरिंग शुरू कर दी गई, जिसका सुरक्षाबलों ने मुंहतोड़ जवाब दिया। दोनों ओर से कई घंटों तक रुक-रुक कर गोलियां चलती रहीं। इस मुठभेड़ में एक इनामी नक्सली समेत कई नक्सलियों के मारे जाने की खबर है, हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी हताहतों की संख्या की पुष्टि नहीं की गई है। कोल्हान रेंज के डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा ने मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बताया कि घटनास्थल से विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है और सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है।

इसी दौरान जरायकेला थाना क्षेत्र के सामठा इलाके से भी एक नक्सली के मारे जाने की सूचना सामने आई है। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि सुरक्षाबलों ने अलग-अलग इलाकों में एक साथ दबाव बनाकर नक्सलियों को घेरने की रणनीति अपनाई है। मुठभेड़ के बाद पूरे सारंडा जंगल क्षेत्र में फायरिंग की आवाजों से दहशत का माहौल बना हुआ है और आसपास के गांवों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

गौरतलब है कि सारंडा जंगल लंबे समय से नक्सलियों का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। यह इलाका भौगोलिक रूप से बेहद दुर्गम है और यहां कई इनामी नक्सली नेता सक्रिय रहे हैं। हाल ही में चाईबासा में सीआरपीएफ के डीजी की अध्यक्षता में एक अहम स्पेशल मीटिंग हुई थी, जिसमें झारखंड और ओडिशा बॉर्डर से सटे इलाकों में नक्सलियों के खिलाफ ठोस और आक्रामक रणनीति तैयार की गई थी। इसी रणनीति के तहत भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई और लगातार ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं।

यह पूरा अभियान केंद्र सरकार के उस लक्ष्य का हिस्सा है, जिसके तहत वर्ष 2026 तक देश को नक्सल मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया है। जहां एक ओर छत्तीसगढ़ जैसे पड़ोसी राज्यों में बड़ी संख्या में नक्सली सरेंडर कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं, वहीं सारंडा इलाके में अब तक नक्सलियों की ओर से कोई बड़ी आत्मसमर्पण की पहल देखने को नहीं मिली है। इसी वजह से सुरक्षाबलों ने अब आर-पार की लड़ाई का रास्ता अपनाया है।

कोल्हान और पोड़ाहाट जैसे क्षेत्रों में लगातार चल रहे अभियानों से यह संकेत साफ मिल रहे हैं कि सुरक्षा बल नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुके हैं। आने वाले दिनों में इन अभियानों के और तेज होने की संभावना है, जिससे सारंडा जैसे दुर्गम इलाकों में भी नक्सली नेटवर्क को पूरी तरह खत्म किया जा सके।