ग्रेटर नोएडा हादसा: खुले गड्ढे में कार गिरने से सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत बनी प्रशासन के लिए सवाल
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Yuvraj Mehta Death Update
सेक्टर-150 में खुले गड्ढे में गिरने से युवराज मेहता की मौत.
चार दिन बाद निकली कार, रेस्क्यू में भारी देरी.
प्रशासन और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर लापरवाही के आरोप.
Greater Noida / ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत ने एक बार फिर शहरी अव्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोल दी है। सड़क किनारे पानी से भरे करीब 20 फुट गहरे कंस्ट्रक्शन गड्ढे में कार गिरने से हुई इस घटना के बाद शुरुआती दिनों तक प्रशासन की निष्क्रियता साफ नजर आई। हालांकि, जैसे ही मामला मीडिया में उछला और सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे, पूरे गौतमबुद्ध नगर जिले का प्रशासन हरकत में आ गया। घटना के चार दिन बाद मंगलवार शाम को युवराज की कार को गड्ढे से बाहर निकाला जा सका, लेकिन तब तक एक होनहार युवा की जान जा चुकी थी और कई अनुत्तरित सवाल पीछे छूट गए।
जानकारी के अनुसार, युवराज मेहता शुक्रवार देर रात करीब 12 बजे अपनी ग्रैंड विटारा कार से कहीं जा रहे थे। उस समय इलाके में घना कोहरा था और सड़क किनारे सुरक्षा के कोई ठोस इंतजाम नहीं थे। बताया गया कि कंस्ट्रक्शन साइट के पास बना गहरा गड्ढा न तो ठीक से घेरा गया था और न ही वहां कोई चेतावनी बोर्ड या रिफ्लेक्टर मौजूद था। इसी लापरवाही के चलते युवराज की कार सड़क से उतरकर सीधे पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी। हादसे के बाद युवराज करीब ढाई घंटे तक जिंदगी और मौत से जूझते रहे। कार के अंदर फंसे युवराज मदद के इंतजार में रहे, लेकिन समय पर न तो पुलिस पहुंची और न ही कोई रेस्क्यू टीम सक्रिय हो सकी। आखिरकार पानी में डूबने से उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि इतने बड़े हादसे के बावजूद रेस्क्यू और जांच में इतनी देरी क्यों हुई। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, युवराज की कार गहरे पानी और कीचड़ में पूरी तरह डूब गई थी, जिससे उसे ढूंढने और निकालने में दिक्कतें आईं। मंगलवार शाम करीब 6:40 बजे एनडीआरएफ की 30 सदस्यीय टीम, स्थानीय प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में क्रेन की मदद से कार को बाहर निकाला गया। लगभग सात घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद ग्रे रंग की ग्रैंड विटारा कार पानी से बाहर लाई जा सकी। कार के ऊपर काफी खरपतवार और कीचड़ जमा था, जो इस बात की गवाही दे रहा था कि गड्ढा लंबे समय से उपेक्षित पड़ा था।
इस घटना के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सेक्टर-150 और आसपास के इलाकों में कई जगह खुले गड्ढे और अधूरे निर्माण कार्य पड़े हैं, जिन पर न तो पर्याप्त बैरिकेडिंग है और न ही रात में दिखाई देने वाले संकेत। लोगों का आरोप है कि पहले भी इन गड्ढों को लेकर शिकायतें की गई थीं, लेकिन प्रशासन ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
युवराज मेहता की मौत के बाद उनका परिवार गहरे सदमे में है। परिजनों का कहना है कि अगर समय पर मदद मिल जाती या सड़क पर सुरक्षा के इंतजाम होते, तो शायद युवराज की जान बचाई जा सकती थी। यह हादसा सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि उस सिस्टम की विफलता है, जो विकास के नाम पर अधूरे काम छोड़ देता है और सुरक्षा को नजरअंदाज करता है।
अब प्रशासन ने जांच के आदेश देने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की बात कही है। साथ ही, खुले गड्ढों को जल्द भरने और कंस्ट्रक्शन साइट्स पर सुरक्षा इंतजाम कड़े करने का दावा किया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ये कदम भविष्य में ऐसे हादसों को रोक पाएंगे या युवराज मेहता की तरह किसी और को भी लापरवाही की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी।