असम को मिली मोबाइल स्ट्रोक यूनिट
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आईसीएमआर की मोबाइल स्ट्रोक यूनिट से दूरस्थ क्षेत्रों में स्ट्रोक मरीजों को समय पर इलाज और बेहतर जीवन की उम्मीद मिली है।
असम में एमएसयू मॉडल से उपचार समय 24 घंटे से घटकर लगभग 2 घंटे रह गया है।
Guwahati/ स्ट्रोक के त्वरित उपचार में आने वाली देरी को कम करने के उद्देश्य से आईसीएमआर ने असम सरकार को दो अत्याधुनिक मोबाइल स्ट्रोक यूनिट (एमएसयू) प्रदान की हैं। यह पहल दूर-दराज और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले स्ट्रोक रोगियों के लिए जीवन रक्षक साबित हो रही है, जहां अस्पताल पहुंचने में कई घंटे लग जाते हैं। अब अस्पताल स्वयं मरीजों तक पहुंच रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के मार्गदर्शन में विकसित यह पहल सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत देश के सबसे कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में भी उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। आईसीएमआर के महानिदेशक और स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव डॉ. राजीव बहल ने एमएसयू सौंपते हुए बताया कि भारत ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल स्ट्रोक यूनिट को आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं से जोड़ने वाला विश्व का दूसरा देश बन गया है।
मोबाइल स्ट्रोक यूनिट एक चलता-फिरता अस्पताल है, जिसमें सीटी स्कैन, विशेषज्ञों से टेलीकंसल्टेशन, प्वाइंट-ऑफ-केयर लैब और रक्त के थक्के तोड़ने वाली दवाएं उपलब्ध हैं। इससे मरीज के घर पर ही स्ट्रोक का शीघ्र निदान और उपचार संभव हो पाता है, जिससे मृत्यु और विकलांगता की आशंका काफी कम हो जाती है।
असम सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव पी. अशोक बाबू ने कहा कि इस हस्तांतरण से राज्य की आपातकालीन स्वास्थ्य प्रतिक्रिया प्रणाली मजबूत होगी और सेवा की निरंतरता सुनिश्चित होगी। उन्होंने बताया कि आईसीएमआर के सहयोग से राज्य में स्ट्रोक उपचार के परिणामों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
पूर्वोत्तर भारत में स्ट्रोक का खतरा अधिक है, जहां दुर्गम भूभाग और सीमित विशेषज्ञ सुविधाएं बड़ी चुनौती हैं। इस समस्या के समाधान के लिए आईसीएमआर ने डिब्रूगढ़, तेजपुर और अन्य चिकित्सा संस्थानों में स्ट्रोक यूनिट स्थापित की हैं। एमएसयू को 108 एम्बुलेंस सेवा से जोड़ने से इसकी पहुंच 100 किलोमीटर तक बढ़ गई है।
इस मॉडल के तहत उपचार समय 24 घंटे से घटकर करीब 2 घंटे रह गया है, मृत्यु दर में एक-तिहाई की कमी आई है और विकलांगता आठ गुना तक कम हुई है, जो इसे भारत की स्वास्थ्य प्रणाली में एक क्रांतिकारी पहल बनाता है।