काशी तमिल संगमम 5.0 में क्या होगा खास? 1,400 प्रतिभागी करेंगे काशी, प्रयागराज और अयोध्या का दौरा!

Wed 04-Nov-2026,11:57 PM IST +05:30

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काशी तमिल संगमम 5.0 में क्या होगा खास? 1,400 प्रतिभागी करेंगे काशी, प्रयागराज और अयोध्या का दौरा! Kashi Tamil Sangamam 2026
  • काशी तमिल संगमम 5.0 का आयोजन 28 नवंबर से 12 दिसंबर तक होगा।

  • तमिलनाडु से लगभग 1,400 प्रतिभागी आठ दिवसीय यात्रा में शामिल होंगे।

  • देशभर के 1,000 उच्च शिक्षण संस्थानों में तिरुक्कुरल से जुड़ी गतिविधियां आयोजित होंगी।

Uttar Pradesh / Varanasi :

Kashi / काशी की आध्यात्मिक विरासत और तमिलनाडु की समृद्ध प्राचीन संस्कृति… जब ये दोनों परंपराएं एक मंच पर मिलेंगी, तो देश को एकता का नया संदेश मिलेगा। लेकिन इस बार इस आयोजन में ऐसा क्या खास होने जा रहा है, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं?

भारत की सांस्कृतिक एकता और भाषाई विरासत को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित होने वाले काशी तमिल संगमम के पांचवें संस्करण यानी KTS 5.0 की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस आयोजन को लेकर 3 नवंबर 2026 को वाराणसी स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय यानी बीएचयू में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उच्च शिक्षा विभाग की सचिव श्रीमती दीप्ति गौर मुखर्जी ने की। इसमें केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन, बीएचयू और भारतीय रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों सहित कई प्रमुख हितधारकों ने हिस्सा लिया।

बैठक का मुख्य उद्देश्य आयोजन की तैयारियों का जायजा लेना और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना था। इस दौरान प्रतिभागियों के आवागमन, विशेष रेल व्यवस्था, रहने की सुविधाओं, आयोजन स्थलों, प्रदर्शनियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और भ्रमण से जुड़ी व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

अधिकारियों ने कार्यक्रम की तैयारियों का आकलन करने के लिए नमो घाट सहित विभिन्न आयोजन स्थलों का दौरा भी किया। खास तौर पर यह देखने पर जोर दिया गया कि प्रतिभागियों को यात्रा से लेकर कार्यक्रमों में भाग लेने तक किसी तरह की परेशानी न हो।

अब बात करते हैं इस बार के आयोजन की सबसे महत्वपूर्ण जानकारी की। काशी तमिल संगमम 5.0 का आयोजन 28 नवंबर से 12 दिसंबर 2026 तक किया जाना निर्धारित है। इस संस्करण का मुख्य विषय है—‘तिरुक्कुरल पयिल्वोम’, यानी ‘तिरुक्कुरल अभ्यास करें’।

इसका उद्देश्य शास्त्रीय तमिल ग्रंथ ‘तिरुक्कुरल’ में समाहित नैतिकता, जीवन-मूल्यों और चरित्र निर्माण से जुड़ी शिक्षाओं को देशभर के युवाओं और विद्यार्थियों तक पहुंचाना है। तिरुक्कुरल को तमिल साहित्य की महत्वपूर्ण रचनाओं में गिना जाता है और इस आयोजन के माध्यम से इसकी शिक्षाओं को व्यापक स्तर पर समझने का अवसर मिलेगा।

कार्यक्रम के तहत तमिलनाडु से लगभग 1,400 प्रतिभागियों के शामिल होने की योजना है। इन्हें करीब 200 लोगों के सात समूहों में बांटा जाएगा। प्रत्येक समूह के लिए आठ दिवसीय यात्रा कार्यक्रम निर्धारित किया गया है, जिसमें चार दिन यात्रा और चार दिन भ्रमण तथा विभिन्न गतिविधियों के लिए रखे जाएंगे।

इस यात्रा के दौरान प्रतिभागी वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या का दौरा करेंगे। यहां सांस्कृतिक, शैक्षणिक, आध्यात्मिक और विषय आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से उत्तर प्रदेश की विरासत और परंपराओं से परिचित कराया जाएगा।

इस आयोजन में शिक्षकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। तमिलनाडु के 50 शिक्षक उत्तर प्रदेश का दौरा करेंगे और काशी तमिल संगमम के दौरान स्कूलों तथा कॉलेजों में विद्यार्थियों को तिरुक्कुरल की शिक्षाओं से परिचित कराएंगे।

इसके अलावा, देशभर के 1,000 उच्च शिक्षण संस्थानों के माध्यम से एक राष्ट्रव्यापी छात्र सहभागिता कार्यक्रम आयोजित करने की भी योजना है। इसके तहत तिरुक्कुरल के अध्ययन, शोध और परिसर आधारित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।

गौरतलब है कि 22 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने KTS 5.0 के वेब पोर्टल और प्रतिनिधियों के पंजीकरण की प्रक्रिया का उद्घाटन किया था। केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान, चेन्नई, डिजिटल पहुंच, प्रकाशनों और संस्थागत सहभागिता की जिम्मेदारी संभाल रहा है। वहीं, आईआईटी मद्रास तमिलनाडु और बीएचयू काशी के लिए नोडल समन्वय संस्थानों के रूप में कार्य कर रहे हैं।

कुल मिलाकर, काशी तमिल संगमम 5.0 केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की भाषाई, शैक्षणिक और आध्यात्मिक विरासत को एक-दूसरे से जोड़ने का प्रयास है। अब देखना होगा कि तिरुक्कुरल की शिक्षाओं के माध्यम से यह आयोजन देश के युवाओं तक भारतीय ज्ञान और जीवन-मूल्यों का संदेश किस तरह पहुंचाता है।