राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह को किया संबोधित
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Tribal University Convocation
राष्ट्रपति मुर्मु ने जनजातीय सशक्तीकरण और समावेशी विकास पर जोर दिया।
छात्रों को कौशल विकास, नवाचार और व्यावहारिक शिक्षा अपनाने की सलाह दी।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में जनजातीय युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
Vijayanagaram / भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को आंध्र प्रदेश के विजयनगरम में केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (Central Tribal University of Andhra Pradesh) के प्रथम दीक्षांत समारोह में भाग लेते हुए छात्रों को शिक्षा, कौशल और समाज सेवा के प्रति समर्पित रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जनजातीय विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान नहीं होते, बल्कि वे सामाजिक न्याय, समावेशी विकास और जनजातीय समुदायों के सशक्तीकरण के महत्वपूर्ण केंद्र होते हैं।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय पर विशेष जिम्मेदारियां हैं। इस संस्थान से अपेक्षा की जाती है कि यह जनजातीय समाज के आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और नीति निर्माण में भागीदारी को मजबूत बनाए। उन्होंने कहा कि ऐसे विश्वविद्यालयों को शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य, कौशल विकास, आजीविका, वनाधिकार और सामाजिक जागरूकता जैसे क्षेत्रों में भी जमीनी स्तर पर कार्य करना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह भविष्य की नई जिम्मेदारियों का आरंभ भी है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे तेजी से बदलती दुनिया में खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए नई तकनीकों, आधुनिक कौशल और नवाचारों को अपनाएं। साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव और सामाजिक समझ भी सफलता के लिए आवश्यक हैं।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि जनजातीय समाज की आजीविका को मजबूत करने के लिए विश्वविद्यालयों को वन उत्पाद, हस्तशिल्प, मिलेट्स, औषधीय पौधों, इको-टूरिज्म और स्थानीय उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में नवाचार आधारित मॉडल विकसित करने चाहिए। इससे स्थानीय समुदायों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा संचालित ‘साइंस एंड टेक्नोलॉजी हब’ की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल उत्तरी आंध्र प्रदेश के जनजातीय समुदायों को आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय जनजातीय कल्याण, सार्वजनिक स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा तथा ऊर्जा संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर शोध और सामुदायिक कार्य कर रहा है, जो भविष्य के भारत के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होंगे।
राष्ट्रपति ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को आगे बढ़ाने में शिक्षा संस्थानों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अपनी समावेशी, पर्यावरण-अनुकूल और व्यावहारिक शिक्षा प्रणाली के माध्यम से इस राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक ज्ञान और प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली भारत की अमूल्य धरोहर है। आधुनिक शिक्षा और पारंपरिक मूल्यों के समन्वय के माध्यम से ही देश का संतुलित और समतामूलक विकास संभव है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस विश्वविद्यालय से निकलने वाले युवा न केवल अपने समुदाय बल्कि पूरे राष्ट्र के विकास में अग्रणी भूमिका निभाएंगे।