ऑपरेशन वज्र में बड़ी सफलता: पुणे की मेफेड्रोन फैक्ट्री का भंडाफोड़, दो मास्टरमाइंड गिरफ्तार
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Operation Vajra
ऑपरेशन वज्र के तहत पुणे में अवैध मेफेड्रोन निर्माण प्रयोगशाला का भंडाफोड़।
उज्जैन और जोधपुर से ड्रग नेटवर्क के दो प्रमुख साजिशकर्ता गिरफ्तार।
बड़ी मात्रा में रसायन, मशीनरी और सिंथेटिक ड्रग्स बनाने के उपकरण जब्त।
Pune / केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) ने सिंथेटिक ड्रग्स की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र के पुणे में संचालित एक अत्याधुनिक मेफेड्रोन (MD) निर्माण प्रयोगशाला का भंडाफोड़ किया है। ‘ऑपरेशन वज्र’ के तहत की गई इस कार्रवाई में गिरोह के दो प्रमुख साजिशकर्ताओं को मध्य प्रदेश के उज्जैन और राजस्थान के जोधपुर से गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई कई राज्यों में फैले मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क पर बड़ी चोट मानी जा रही है।
सीबीएन की नीमच इकाई को विशेष खुफिया जानकारी मिलने के बाद 1 से 10 जुलाई 2026 के बीच यह अभियान चलाया गया। जांच के दौरान अधिकारियों ने पुणे के भोसरी क्षेत्र में स्थित एक गुप्त और अत्याधुनिक ड्रग निर्माण केंद्र का पता लगाया। छापेमारी में बड़ी मात्रा में प्रयोगशाला उपकरण, रसायन, डिजिटल मशीनरी और सुरक्षा उपकरण बरामद किए गए, जिनका इस्तेमाल मेफेड्रोन जैसे सिंथेटिक नशीले पदार्थों के निर्माण में किया जा रहा था।
यह कार्रवाई फरवरी 2026 में शुरू हुई जांच का विस्तार थी। उस समय सीबीएन ने मंदसौर में एक यात्री बस से 8.17 किलोग्राम मेफेड्रोन जब्त किया था। इसके बाद महू क्षेत्र के थावले गांव में एक अवैध प्रयोगशाला का पता चला था, जहां से 43.82 किलोग्राम मेफेड्रोन, 261.32 किलोग्राम रासायनिक पदार्थ और अत्याधुनिक निर्माण उपकरण बरामद किए गए थे।
जांच आगे बढ़ने पर अधिकारियों को पता चला कि गिरोह का मुख्य सरगना नकली पहचान पत्रों का उपयोग कर विभिन्न राज्यों में लगातार ठिकाने बदल रहा था। लगातार निगरानी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर सीबीएन ने उज्जैन पुलिस के सहयोग से 3 जुलाई की रात उसे गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ और तकनीकी जांच के दौरान एक अन्य बड़े नेटवर्क का भी खुलासा हुआ। जानकारी मिली कि पुणे में चल रही दूसरी अवैध फैक्ट्री को जोधपुर स्थित एक सहयोगी द्वारा वित्तीय सहायता और संचालन समर्थन दिया जा रहा था। इसके बाद सीबीएन की टीमों ने पुणे और जोधपुर में एक साथ छापेमारी कर दूसरे आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया।
सीबीएन अधिकारियों के अनुसार, दोनों आरोपियों को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 के तहत गिरफ्तार किया गया है। बरामद मशीनरी, रसायन और अन्य सामग्री को कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्त कर लिया गया है तथा मामले की आगे जांच जारी है।
गौरतलब है कि केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो वित्त मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाली एक प्रमुख कानून प्रवर्तन एजेंसी है। वर्ष 2026 में अब तक सीबीएन ने 142 मामले दर्ज किए हैं, 193 लोगों को गिरफ्तार किया है और चार गुप्त ड्रग प्रयोगशालाओं का भंडाफोड़ किया है। एजेंसी का कहना है कि ऐसे अभियान देश को नशा मुक्त बनाने और संगठित मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क को खत्म करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।