Ayodhya News: हनुमानगढ़ी के महंत संत रामदास का निधन, संत समाज में शोक
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Hanumangarhi Mahant Sant Ramdas Passes Away
हनुमानगढ़ी के महंत संत रामदास का 85 वर्ष की आयु में निधन।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने जताया गहरा शोक और श्रद्धांजलि दी।
सरयू तट पर वैदिक विधि से होगा अंतिम संस्कार।
Ayodhya / अयोध्या की धार्मिक और आध्यात्मिक परंपरा को बड़ा आघात पहुंचा है। हनुमानगढ़ी के वरिष्ठ महंत और संत समाज के सम्मानित संत महंत संत रामदास का 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे महंत रामदास ने शनिवार को अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही अयोध्या सहित देशभर के संत समाज, श्रद्धालुओं और उनके अनुयायियों में शोक की लहर दौड़ गई।
महंत संत रामदास अयोध्या के सबसे प्रतिष्ठित संतों में गिने जाते थे। वे हनुमानगढ़ी की उज्जैनिया पट्टी के प्रमुख महंत थे और वर्षों से धार्मिक, सामाजिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों के माध्यम से लोगों का मार्गदर्शन कर रहे थे। उनका व्यक्तित्व संत समाज में अत्यंत सम्मानित था और उनकी बातों को श्रद्धा के साथ सुना जाता था।
हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उनके निधन की जानकारी साझा की। उन्होंने अस्पताल की एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा कि उनके पूज्य गुरुदेव, श्री महंत संत रामदास जी महाराज का गोलोकवास हो गया है। इस सूचना के साथ उन्होंने अंतिम यात्रा और अंतिम संस्कार के कार्यक्रम की भी जानकारी दी। उनके अनुसार, महंत रामदास की शोभा यात्रा शनिवार दोपहर बाद निकाली जाएगी और शाम 4 बजे सरयू तट स्थित नया घाट (कच्चा घाट) पर वैदिक रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, महंत संत रामदास पिछले कई महीनों से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्हें उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियां थीं। लगभग आठ महीने से उनका लगातार उपचार चल रहा था। हाल ही में उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज हुआ। स्वास्थ्य में कुछ सुधार के बाद वे तीन दिन पहले ही अयोध्या लौटे थे, लेकिन अचानक उनके निधन की खबर ने सभी को स्तब्ध कर दिया।
महंत रामदास का उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी विशेष आत्मीय संबंध था। मुख्यमंत्री जब भी अयोध्या प्रवास पर आते थे, तो अक्सर उनसे मुलाकात कर आशीर्वाद प्राप्त करते थे। कई अवसरों पर सीएम योगी ने उन्हें गदा और रामनामा भेंट कर सम्मानित भी किया था। उनके निधन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल श्रद्धालुओं को इस दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें।
महंत संत रामदास केवल एक धार्मिक गुरु ही नहीं थे, बल्कि वे अयोध्या की संत परंपरा के एक महत्वपूर्ण स्तंभ भी थे। उनके मार्गदर्शन में अनेक संतों और शिष्यों ने आध्यात्मिक जीवन की दिशा प्राप्त की। हनुमानगढ़ी के वर्तमान महंत राजू दास भी उनके शिष्य हैं और उन्होंने अपने गुरु के सान्निध्य में लंबे समय तक सेवा की है।
उनके निधन को अयोध्या के संत समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि महंत रामदास का जीवन सेवा, साधना और सनातन परंपरा के संरक्षण के लिए समर्पित रहा। उनके जाने से एक ऐसा आध्यात्मिक शून्य पैदा हुआ है, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा। उनकी स्मृतियां और शिक्षाएं आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेंगी।