BRICS Meet: भारत ने कोयला गैसीकरण को बताया ऊर्जा सुरक्षा का भविष्य

Wed 24-Jun-2026,11:19 PM IST +05:30

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BRICS Meet: भारत ने कोयला गैसीकरण को बताया ऊर्जा सुरक्षा का भविष्य BRICS Energy Dialogue
  • ब्रिक्स मंच पर भारत ने कोयला गैसीकरण को ऊर्जा सुरक्षा का प्रमुख साधन बताया। 

  • 2030 तक 10 करोड़ टन कोयला गैसीकरण का लक्ष्य दोहराया गया।

  • स्वच्छ कोयला तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर विशेष जोर।

Delhi / Delhi :

Delhi / भारत की ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से कोयला मंत्रालय ने ब्रिक्स देशों के साथ स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों पर एक महत्वपूर्ण साइड इवेंट आयोजित किया। इस कार्यक्रम का मुख्य फोकस कोयला गैसीकरण तकनीक पर रहा, जिसे भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं और औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने के लिए एक प्रभावी विकल्प माना जा रहा है। कार्यक्रम में भारत के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के प्रतिनिधि, उद्योग जगत के विशेषज्ञ, तकनीकी प्रदाता और रूस, इथियोपिया तथा संयुक्त अरब अमीरात सहित कई ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कोयला मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सनोज कुमार झा ने कहा कि कोयला गैसीकरण भारत के लिए ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। उन्होंने बताया कि इस तकनीक के माध्यम से कोयले को सिंथेटिक गैस में परिवर्तित किया जाता है, जिसका उपयोग अमोनिया, मेथनॉल, हाइड्रोजन, सिंथेटिक ईंधन, डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (DRI) और अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्माण में किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार वर्ष 2030 तक 10 करोड़ टन कोयले के गैसीकरण का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार नीतिगत समर्थन, वित्तीय प्रोत्साहन, कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करने और विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय पर विशेष ध्यान दे रही है। उनका मानना है कि कोयला गैसीकरण तकनीक आयात पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ घरेलू संसाधनों के अधिक कुशल उपयोग को भी बढ़ावा देगी।

कार्यक्रम के दौरान भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल), जिंदल स्टील लिमिटेड (जेएसएल) और ग्रेटा एनर्जी ने अपनी-अपनी कोयला गैसीकरण परियोजनाओं और तकनीकी अनुभवों को साझा किया। वहीं ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) ने कास्ता भूमिगत कोयला गैसीकरण पायलट परियोजना की प्रगति के बारे में जानकारी दी। इसके अलावा कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने कोयला गैसीकरण के लिए उपलब्ध कोयला लिंकेज व्यवस्था और अपनी विभिन्न परियोजनाओं को प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण विशेषज्ञों के बीच आयोजित पैनल चर्चा रही, जिसमें कोयला गैसीकरण से जुड़ी तकनीकी चुनौतियों, परियोजना लागत, उच्च राख वाले भारतीय कोयले के उपयोग, भूवैज्ञानिक परिस्थितियों और वित्तीय सहायता जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए मजबूत नीतिगत समर्थन और निवेश की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

इस आयोजन ने ब्रिक्स देशों के बीच ज्ञान, अनुभव और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया। साथ ही यह स्पष्ट संदेश भी दिया कि स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियां ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक विकास और पर्यावरणीय संतुलन के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। भारत ने इस मंच के माध्यम से स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा भविष्य की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर मजबूत किया है।