VIP Culture in India: उपराष्ट्रपति ने लोकतंत्र में समानता और जवाबदेही पर दिया जोर
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VIP Culture India
उपराष्ट्रपति ने VIP संस्कृति पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया।
लोकतंत्र में समानता, जवाबदेही और जनसेवा के महत्व पर जोर।
सार्वजनिक पद को विशेषाधिकार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी बताया।
Delhi / भारत में लोकतंत्र की सफलता केवल चुनावों और संस्थाओं पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उन मूल्यों पर भी आधारित होती है जो सार्वजनिक जीवन और शासन को दिशा देते हैं। इसी संदर्भ में उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में "VIP Culture in India: Power, Privilege and the Distance from Democracy" पुस्तक का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह पुस्तक भारतीय लोकतंत्र के एक महत्वपूर्ण विषय को सामने लाती है और नागरिकों तथा सत्ता के बीच संबंधों पर गंभीर विचार करने का अवसर प्रदान करती है।
यह पुस्तक अरुणाचल प्रदेश के पूर्व राज्यसभा सांसद नबम रेबिया और सह-लेखक संदीप कुमार द्वारा लिखी गई है। पुस्तक में भारत में वीआईपी संस्कृति, सत्ता के विशेषाधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों के बीच संतुलन की आवश्यकता पर चर्चा की गई है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय संविधान न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के सिद्धांतों पर आधारित है और लोकतंत्र की वास्तविक ताकत तभी दिखाई देती है जब सार्वजनिक पद को विशेषाधिकार नहीं बल्कि जिम्मेदारी और सेवा का माध्यम माना जाए।
अपने संबोधन में श्री राधाकृष्णन ने महान तमिल संत-कवि तिरुवल्लुवर का उल्लेख करते हुए कहा कि सच्चे नेतृत्व की पहचान उसकी सुलभता, करुणा और जवाबदेही से होती है। उन्होंने कहा कि जो नेता जनता के बीच रहते हैं, उनकी समस्याओं को समझते हैं और सम्मानपूर्वक संवाद करते हैं, वही लंबे समय तक लोगों का विश्वास जीतते हैं।
उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नागरिक-केंद्रित शासन मॉडल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने लाल बत्ती संस्कृति समाप्त करने जैसे फैसलों के माध्यम से यह संदेश दिया कि लोकतंत्र में कोई भी व्यक्ति विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग का हिस्सा नहीं है। उन्होंने हाल ही में नीट परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए अपने कार्यक्रम में बदलाव करने की घटना का भी जिक्र किया और इसे संवेदनशील नेतृत्व का उदाहरण बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री के उस कथन को दोहराया कि "हर भारतीय विशेष है और हर भारतीय एक वीआईपी है।"
कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की सादगी और जनसेवा के प्रति समर्पण का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे नेताओं ने सार्वजनिक जीवन में नैतिकता और सेवा की मिसाल कायम की। उन्होंने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि इसमें उपनिषद, रामचरितमानस, भगवान बुद्ध की शिक्षाएं और पंचतंत्र जैसे भारतीय ज्ञान परंपरा के स्रोतों का प्रभावी उपयोग किया गया है।
उन्होंने समाज और शासन से जुड़े सभी लोगों से आग्रह किया कि वे समानता, विनम्रता, जवाबदेही और सेवा के मूल्यों को अपनाएं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी नेता की असली पहचान उसके पद या शक्ति से नहीं, बल्कि जनता के बीच अर्जित विश्वास और समाज के लिए किए गए कार्यों से होती है।
इस अवसर पर अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नबम तुकी, पूर्व राज्यसभा सांसद डब्ल्यू.आर. खारलुखी, लेखक नबम रेबिया और सह-लेखक संदीप कुमार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम लोकतांत्रिक मूल्यों और जनसेवा की भावना को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण संदेश देकर संपन्न हुआ।