उपराष्ट्रपति का नशा मुक्त भारत का आह्वान, युवाओं से जागरूकता अभियान में जुड़ने की अपील
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उपराष्ट्रपति ने नशा मुक्त भारत को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।
युवाओं और स्वास्थ्य पेशेवरों से जागरूकता अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील।
नशामुक्त परिसर, मानसिक स्वास्थ्य और शोध आधारित नीति निर्माण पर जोर।
Delhi / उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने देश को नशामुक्त बनाने के लिए समाज के सभी वर्गों से एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार या कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें शैक्षणिक संस्थानों, परिवारों, स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों और युवाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। उनका मानना है कि नशे के खिलाफ यह अभियान व्यक्ति से शुरू होकर पूरे देश का जनआंदोलन बनना चाहिए।
बेंगलुरु के श्री कांतीरवा स्टेडियम में आयोजित ‘नशा मुक्त भारत सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि नशीले पदार्थों का सेवन केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि शिक्षा, रोजगार, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय विकास को भी प्रभावित करता है। यह सम्मेलन राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (आरजीयूएचएस) के 31वें स्थापना दिवस के अवसर पर स्वापक नियंत्रण ब्यूरो और दिशा बोध फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित किया गया था।
अपने संबोधन में उन्होंने बड़ी संख्या में उपस्थित विद्यार्थियों की सराहना की, जिन्होंने बेंगलुरु, कर्नाटक और पूरे भारत को नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि “नशा मुक्त भारत” का अर्थ केवल नशे से दूर रहना नहीं है, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, सही निर्णय लेना, मजबूत पारिवारिक मूल्यों को बढ़ावा देना और समाज में सकारात्मक वातावरण तैयार करना भी है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि व्यक्ति का अपने मन पर नियंत्रण होना बेहद आवश्यक है। जब नशा व्यक्ति के जीवन में प्रवेश करता है तो वह धीरे-धीरे उसकी सोच, व्यवहार और निर्णय लेने की क्षमता पर हावी हो जाता है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि नशे की वजह से खोई गई हर युवा जिंदगी देश की क्षमता और भविष्य की हानि है।
उन्होंने चिकित्सा और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े छात्रों, डॉक्टरों, नर्सों, फार्मासिस्टों, मनोवैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से अपील की कि वे जागरूकता फैलाने में अग्रणी भूमिका निभाएं। साथ ही उन्होंने मादक पदार्थों के दुरुपयोग से निपटने के लिए रोकथाम, उपचार, अनुसंधान और वैज्ञानिक नीति निर्माण को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
श्री राधाकृष्णन ने कहा कि व्यसन चिकित्सा, मानसिक स्वास्थ्य, व्यवहार विज्ञान और सामुदायिक उपायों पर अधिक शोध किए जाने की जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशे जैसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए नीतियां केवल अनुमानों पर नहीं, बल्कि ठोस शोध और प्रमाणों पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने तकनीक, परामर्श सेवाओं और सहकर्मी सहायता समूहों के महत्व को भी रेखांकित किया।
उपराष्ट्रपति ने शिक्षण संस्थानों को नशामुक्त बनाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने बताया कि तीन केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में वे लगातार नशामुक्त परिसर अभियान को बढ़ावा देते रहे हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय में शुरू किए गए ‘नशामुक्त परिसर अभियान’ और ई-प्रतिज्ञा मंच की भी सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के तहत बच्चों को पोलियो की दवा भी पिलाई और राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपतियों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि समाज के सभी वर्ग मिलकर प्रयास करें तो नशामुक्त भारत का सपना निश्चित रूप से साकार किया जा सकता है।